मऊ। जिले में हत्या और हत्या के प्रयास के कई मामलों में नामजद पूर्व ब्लाक प्रमुख मनोज राय के लिए भारतीय जनता पार्टी किसी वाशिंग मशीन से कम साबित नही हो रही है। मनोज और उनके पिता परिवार के नाम गलत तरीके से इकटठा की गई सपत्तियों पर स्थानीय प्रशासन मौन साधे समय काट रहा है। भाजपा सरकार में मनोज के खिलाफ कर्रवाई न हो इसके लिए चोरी के आरोपी भाजप जिलाध्यक्ष की संगत में मंदिर निर्माण में भी इनके द्वारा लाखों का धन दान देकर पार्टी की कृपा लेने में बची कसर पूरी कर दी गई है।
पुलिस, शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार मनोज राय जिले के टाप टेन बदमासों में सुमार किए जाते है, इनके खिलाफ एक दर्जन से अधिक गंभीर मुकदमें है। कपिलदेव हत्या कांड और पवन हत्या कांड के बाद चर्चा में आए मनोज ने जिस तरह से अपने और पिता परिवार के नाम धन इकटठा किया है। उसका कोई पुरसाहाल नही है। मनोज, मनीष, अखिलेश और उनकी माता इंदू राय और पिता प्रकाश राय ने जिस तरह से धन इकटठा किया है उसकी यदि जांच की जाएं तो एक बडे बेनामी संपत्तियों को सरकार के नाम होने से नही रोका जा सकता है। यदि राजस्व विभाग के रिकार्डो में देखा जाएं तो मनोज राय एंड कंपनी ने अपने अपराधिक कारनामों से सरकार को भी पलीता लगाया जा चुका है। इन्होने बाहे और चकरोड की जमीन जिसे 132 की प्रापर्टी कहा जाता है को भी कब्जा कर उस पर बापू आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज खड़ा किया गया है। चहुओर सार्वजनिक उपयोग की जमीनों पर हुए अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई लेकिन मनोज एंड कपनी के इस महल पर प्रशासन जरीब गिराकर कार्रवाई से पीछे भाग गया। यह है मनोज के अपराधों के दहशत का नतीजा! यही नही साहब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक इस मनोज के अपराधिक दहशत से हाथ मिला चुके है। हाल के दिनों में पीएमओ दफ्तर में वतौर आईएएस रहे एके शर्मा जी भी जो इन दिनों भाजपा के एमएलसी है ने भी मनोज के उस कार्यक्रम में शिरकत कर चुके है जिसमें मनोज ने मंदिर निर्माण को 11लाख 11 हजार और 11 रुपये का दान दिया है। बताते चले कि जिस तरह से मुख्तार के अपराधिक कारनामों से पूरे देश मे दहशत है उसी तरह से मऊ जिले में मनोज की भी है। मनोज के अपराधिक कारनामों की दहशत में सामान्य व्यक्ति चाह कर भी खिलाफत में प्राथमिकी और गवाही को तैयार नही होता है।
मऊ मे कुख्यात मनोज के लिए वाशिग मशीन साबित हो रही भाजपा
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