Monday, April 6, 2026
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भैरवाष्टमी : पियरी भैरव मंदिर से निकली शोभायात्रा,उत्साह से किन्नर भी हुए शामिल

वाराणसी (हि.स.)। भैरवाष्टमी की पूर्व संन्ध्या पर शुक्रवार को पियरी स्थित भैरव मंदिर से बाबा काल भैरव की भव्य शोभायात्रा निकली। शोभायात्रा गोला दीनानाथ, काशीपुरा, कर्णघंटा, बुलानाला, मैदागिन, मृत्युंजय महादेव, भैरवनाथ होते हुए फिर पियरी मंदिर पर जाकर विराम ली।

शोभायात्रा में पहाड़ी बाजे की धुन,गाजे-बाजे के साथ डमरू वादन, झांकी आकर्षण का केन्द्र रही। शोभायात्रा के पहले भैरव के विग्रह को पंचामृत स्नान कराया गया। विधिवत पूजन अर्चन के पारंपरिक रजत मुखौटा धारण कराकर श्रृंगार किया गया। इसके बाद निकली शोभायात्रा की अगुआई किन्नरों की मंडली ने किया।

मंदिर के महंत राजेश्वरानंद ने बताया कि तीन दिवसीय आयोजन में पहले दिन शोभायात्रा निकाली गईं दूसरे दिन शनिवार को बाबा का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। भैरवाष्टमी के अवसर पर हवन, अष्टभैरव पूजन, श्रृंगार, बाबा के जन्मोत्सव की झांकी सजेगी। रात में बाबा कालभैरव की महाआरती की जायेगी। 28 नवंबर को भंडारा और प्रसाद वितरण किया जायेगा।

भैरव भगवान शिव के क्रोध रूप अवतार है। कथा है कि भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव बातचीत कर रहे थे कि कौन उन सभी में श्रेष्ठ है। इस बहस में, महादेव को भगवान ब्रह्मा द्वारा की गई टिप्पणी से थोड़ा क्रोध आ गया। उन्होंने अपने गण भैरव को ब्रह्मा के पांच सिर में से एक को काटने का निर्देश दिया। भैरव ने शिव की आज्ञा का पालन किया और ब्रह्मा का एक सिर काट दिया। इस तरह वे चार मुखिया बन गए। यह देंख भय से भरे देवताओं ने भगवान शिव और भैरव से प्रार्थना की।

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