– तीन दिन के विचार-मंथन में तय होगी 21वीं सदी की समुद्री रणनीति
– समुद्री मुद्दों पर हितों और समानता के समावेश का पता लगाने पर जोर
नई दिल्ली (हि.स.)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत अपने समुद्री हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए इंडो-पैसिफिक की समुद्री क्षमता का कुशल और सहयोगी उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह वार्ता इंडो-पैसिफिक के लिए देश के साझा और सामूहिक विजन को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि वह उन सिफारिशों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो तीन दिन के विचार-मंथन के बाद मिलेंगी।
राजनाथ सिंह बुधवार से शुरू हुए भारतीय नौसेना के तीन दिवसीय ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग (आईपीआरडी) के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन में समुद्री चुनौतियों पर चर्चा करके उनका समाधान करने पर मंथन किया जाना है। उन्होंने आईपीआरडी के 2021 संस्करण की सफलता की कामना करते हुए कहा कि इस सम्मेलन में विचार-विमर्श के बाद बेहतर नतीजे निकलने की उम्मीद है। उन्होंने हिंद-प्रशांत के लिए हमारे साझा और सामूहिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए इस वार्ता के संचालन में सहयोग करने के लिए भारतीय नौसेना और नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन (एनएमएफ) को धन्यवाद भी दिया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि एक तरफ समुद्र के जरिये मानव जाति के पालन-पोषण और विकास का मौका मिलता है तो दूसरी तरफ इससे आतंकवाद, समुद्री डकैती, मादक पदार्थों की तस्करी और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां भी मिलती हैं। उन्होंने इन चुनौतियों के लिए सहयोग का आह्वान करते हुए कहा कि इसके काफी अंतरराष्ट्रीय निहितार्थ हैं।
इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग में आठ विशिष्ट उप-विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा, जिससे चुनौतियों का मुकाबला करके आगे का रास्ता तय किया जा सके। इन मुद्दों पर लगातार तीन दिनों में आठ सत्रों में पैनल-चर्चा होगी, जिससे विभिन्न दृष्टिकोणों पर विचार करने की पर्याप्त गुंजाइश होगी। इसका उद्देश्य विचारों और विचारों के मुक्त प्रवाह को प्रोत्साहित करना है। इनमें आठ बिंदु प्रमुख हैं:-
1. इंडो-पैसिफिक के भीतर विकसित समुद्री रणनीतियां: अभिसरण, विचलन, अपेक्षाएं और आशंकाएं
2. समुद्री सुरक्षा पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए अनुकूल रणनीति
3. बंदरगाह के नेतृत्व वाली क्षेत्रीय समुद्री संपर्क और विकास रणनीति
4. सहकारी समुद्री डोमेन में जागरुकता और रणनीति
5. नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम ऑर्डर पर कानून के बढ़ते सहयोग का प्रभाव
6. क्षेत्रीय सार्वजनिक-निजी समुद्री भागीदारी को बढ़ावा देने की रणनीति
7. ऊर्जा-असुरक्षा और शमन रणनीति
8. समुद्र में मानव-मानव रहित गोरखधंधा रोकने की रणनीति
इस उद्घाटन सत्र के दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह, पूर्व नौसेना प्रमुख एवं अध्यक्ष राष्ट्रीय समुद्री फाउंडेशन के अध्यक्ष एडमिरल सुनील लांबा (सेवानिवृत्त), विभिन्न देशों के क्षेत्र विशेषज्ञ और नीति निर्माता वर्चुअल रूप से उपस्थित थे।
