–आज के युवा अपनी भारतीय संस्कृति को आत्मसात करें
प्रयागराज(हि.स.)। विश्व की प्राचीन एवं महान सभ्यताओं तथा संस्कृतियों में से एक भारतीय संस्कृति के मूल आधार हैं। अहिंसा परमो धर्म, सत्यमेव जयते, अतिथि देवो भव, वसुधैव कुटुंबकम् आदि भारतीय संस्कृति के मूल वाक्य हैं। हमारे महापुरुषों एवं संस्कृति ने हमेशा अपने कल्याण से पहले परकल्याण की भावना को महत्व दिया।
उक्त विचार ’यूथ फॉर नेशन’ के राष्ट्रीय मंत्री प्रयागराज के संतोष तिवारी ने भुवनेश्वर ओडिशा में 14-15 अप्रैल को राष्ट्रीय कार्यकारिणी एवं युवा संवाद में ‘भारतीय संस्कृति और आज का युवा’ विषय पर व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज कल्याण के लिए दधीचि द्वारा हड्डियां त्याग देना, राजा शुवि द्वारा कबूतर की रक्षा के लिए अपना मांस काटकर चढ़ा देना, कर्ण द्वारा अपना कवच कुण्डल इंद्र को दान कर देना, राजा हरिश्चंद्र द्वारा वचन पालन के लिये सर्वस्व बलिदान कर देना आदि उदाहरण भारतीय सभ्यता और संस्कृति की समृद्धि तथा महानता के उदाहरण हैं।
संतोष तिवारी ने कहा कि आज फटी जींस, सिगरेट के धुएं का छल्ला बनाना, उल्टी टोपी, कान में बड़ी-बड़ी बाली, ऊंची एड़ी की सैंडिल, आंखों पर रंगीन चश्मा, शरीर को ढकते कम दिखाते ज्यादा उत्तेजक वस्त्र आदि आज के युवाओं की पहचान हो गई है। इससे हमारी संस्कृति क्षीण हो रही है और पाश्चात्य संस्कृति आज के युवाओं पर हावी हो रही है। क्या इससे हमारी संस्कृति बच पाएगी। उन्होंने कहा कि हमें युवाओं को अपनी पुरानी संस्कृतियों एवं परम्पराओं की अच्छाइयों को समझाना चाहिए और उन्हें उसको आत्मसात करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
इस अवसर पर ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष डॉ सूर्य नारायण पात्रा, कालीकट विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो प्रफुल्ल कुमार मोहंती, कालाहांडी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो संजय सत्यपति, यूथ फॉर संस्थापक एवं अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ महेश शर्मा, ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष ममता बाजपेई, प्रदेश संयोजक सविता स्वाइन, पश्चिम बंगाल से मानवेंद्र शर्मा, भारत भूषण, राजस्थान से पंकज चतुर्वेदी, राजस्थान से हेमन्त शर्मा, दिल्ली से काशी पंडित, त्रिपुरा से तनुज शाह आदि पूरे भारत से आये प्रतिनिधि उपस्थित थे।
विद्या कान्त
