Tuesday, January 13, 2026
Homeविचारभाजपा की जीवन यात्रा : नहीं भूला मुखर्जी का सपना

भाजपा की जीवन यात्रा : नहीं भूला मुखर्जी का सपना

जनसंघ खत्म हो गया लेकिन भाजपा ने मूल एजेंडा नहीं छोड़ा

(भाजपा की स्थापना दिवस 06 अप्रैल पर विशेष)

अतुल द्विवेदी

भारतीय जनता पार्टी यानि भाजपा का गठन आज से ठीक पैंतालीस वर्ष पहले छह अप्रैल 1980 को हुआ था, लेकिन इसकी वैचारिक नींव लगभग तीन दशक पहले रखी जा चुकी थी। भारतीय जनसंघ के रूप में इस संगठन ने जो रास्ता चुना था, वह अब भी भाजपा की पहचान का मूल है। सत्ता की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए पार्टी भले ही नई नीतियों और नारों के साथ आगे बढ़ी हो, लेकिन उसकी आत्मा अब भी श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय के राष्ट्रवादी विचारों में बसती है। जनसंघ के समाप्त हो जाने के बावजूद, भाजपा ने उसके मूल एजेंडे को त्यागा नहीं है। आजादी के बाद भारतीय राजनीति में विचारधारा की लड़ाई निर्णायक रूप में सामने आई। कांग्रेस का प्रभाव चरम पर था और पंडित जवाहरलाल नेहरू का विजन देश को दिशा दे रहा था। लेकिन यह वह दौर भी था, जब कश्मीर से लेकर पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार जैसे मुद्दों पर सवाल उठ रहे थे। नेहरू मंत्रिमंडल में शामिल डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इन्हीं कारणों से इस्तीफा दे दिया और एक वैकल्पिक राष्ट्रवादी राजनीतिक विकल्प की नींव रखी।

यह भी पढें: वक्फ संशोधन विधेयक ’उम्मीद’ बनकर लागू, विवादों के बीच राष्ट्रपति की मुहर

21 अक्टूबर 1951 को दिल्ली के राघोमल आर्य कन्या विद्यालय में भारतीय जनसंघ का गठन हुआ। यह महज एक पार्टी नहीं थी, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा का राजनीतिक विस्तार था। जनसंघ ने कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानते हुए विशेष दर्जा देने का विरोध किया। यही नहीं, कश्मीर में आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए जाने के बाद मुखर्जी की रहस्यमयी मौत ने जनसंघ को वैचारिक ऊर्जा दी। उसके बाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने संगठन की बागडोर संभाली और भारत-चीन युद्ध के दौरान जनसंघ ने सरकार की नीतियों का खुला विरोध कर जनता के बीच अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।
1967 के आम चुनावों में जनसंघ ने कई राज्यों में कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर एक सशक्त विपक्ष के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की। लेकिन असली चुनौती आपातकाल के समय आई। 25 जून 1975 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संविधान की धारा 352 के तहत देश में आपातकाल लागू कर दिया। इसके बाद जनसंघ समेत सभी विपक्षी दलों पर दमनचक्र चला। सैकड़ों कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इस चुनौतीपूर्ण समय में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में सभी विपक्षी दल एकजुट हुए और जनता पार्टी का गठन किया। 1977 में कांग्रेस की ऐतिहासिक हार हुई और जनता पार्टी सत्ता में आई। जनसंघ ने खुद को इस नई पार्टी में विलीन कर दिया, लेकिन यह एक अस्थायी एकता साबित हुई। विचारधारात्मक मतभेद, नेतृत्व संघर्ष और ’दोहरी सदस्यता’ विवाद ने पार्टी को हिलाकर रख दिया। संघ से जुड़े नेताओं को हटाने की मांग ने जनसंघ पृष्ठभूमि वाले नेताओं को असहज कर दिया। अंततः 6 अप्रैल 1980 को जनसंघ की कोख से भाजपा ने जन्म लिया।

यह भी पढें: राजस्थान रॉयल्स ने घर में ही तोड़ी पंजाब किंग्स की अपराजेय रफ्तार

नई पार्टी बनी लेकिन मूल विचारों से समझौता नहीं किया गया। भाजपा ने एकात्म मानववाद, राष्ट्रवाद और सुशासन के एजेंडे को केंद्र में रखते हुए नई यात्रा शुरू की। पार्टी के पहले अध्यक्ष बने अटल बिहारी वाजपेयी, जो आगे चलकर भाजपा के सबसे स्वीकृत चेहरे के रूप में उभरे। 1980 के दशक में पार्टी ने जनता के बीच पैठ बनाने के लिए राम जन्मभूमि आंदोलन को गति दी। 1990 में लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा ने जनभावनाओं को जोड़ते हुए पार्टी को एक नई ऊंचाई दी। इस यात्रा के बाद भाजपा ने वीपी सिंह सरकार से समर्थन वापस लिया और देश में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति बनी। लेकिन इस अस्थिरता के दौर में भाजपा ने खुद को मजबूत किया।
1996 में अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन बहुमत न होने के कारण उनकी सरकार सिर्फ 13 दिन चली। 1998 में फिर चुनाव हुए, भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और एनडीए सरकार बनी। हालांकि यह सरकार भी लंबे समय तक नहीं चल सकी, लेकिन 1999 में फिर से मिली सफलता ने वाजपेयी को स्थायी प्रधानमंत्री बनाया। वाजपेयी युग के बाद पार्टी को नई ऊर्जा नरेंद्र मोदी के रूप में मिली। 2014 में भाजपा ने पूर्ण बहुमत हासिल कर इतिहास रचा। 2019 में यह विजय दोहराई गई। हालाँकि 2024 में उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन वह फिर भी सरकार बनाने में कामयाब रही। इन वर्षों में अनुच्छेद 370 का हटाया जाना, राम मंदिर निर्माण, नागरिकता कानून जैसे मुद्दों पर पार्टी ने मुखर्जी के सपनों को जमीन पर उतारा।

यह भी पढें: https://www.bjp.org/home

आज जब भाजपा अपने 45वें स्थापना दिवस को मना रही है, तब यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि जनसंघ समाप्त नहीं हुआ, वह सिर्फ नए नाम और संगठन में ढल गया है। विचार वही हैं, तेवर बदल गए हैं। संघ का राष्ट्रवादी विजन अब शासन के स्तर पर नजर आता है। जहां कभी जनसंघ के नेताओं को जेलों में ठूंसा गया था, वहां अब उन्हीं के विचारों के अनुयायी देश की संसद, मंत्रालय और वैश्विक मंचों पर प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। भाजपा के लिए यह सिर्फ एक सालगिरह नहीं, बल्कि उस विचार यात्रा की पुष्टि है, जो डॉ. मुखर्जी के बलिदान से शुरू हुई थी और आज नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर राष्ट्रवाद का चेहरा बन चुकी है। पार्टी का फलक भले ही बदल गया हो, लेकिन विचारों का मूल रंग अब भी भगवा ही है।

भाजपा की जीवन यात्रा : नहीं भूला मुखर्जी का सपना

यह भी पढें: जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी में बगावत

पोर्टल की सभी खबरों को पढ़ने के लिए हमारे वाट्सऐप चैनल को फालो करें : https://whatsapp.com/channel/0029Va6DQ9f9WtC8VXkoHh3h अथवा यहां क्लिक करें : www.hindustandailynews.com

कलमकारों से: तेजी से उभरते न्यूज पोर्टल www.hindustandailynews.com पर प्रकाशन के इच्छुक कविता, कहानियां, महिला जगत, युवा कोना, सम सामयिक विषयों, राजनीति, धर्म-कर्म, साहित्य एवं संस्कृति, मनोरंजन, स्वास्थ्य, विज्ञान एवं तकनीक इत्यादि विषयों पर लेखन करने वाले महानुभाव अपनी मौलिक रचनाएं एक पासपोर्ट आकार के छाया चित्र के साथ मंगल फाण्ट में टाइप करके हमें प्रकाशनार्थ प्रेषित कर सकते हैं। हम उन्हें स्थान देने का पूरा प्रयास करेंगे : जानकी शरण द्विवेदी (प्रधान संपादक) मोबाइल- 9452137310 E-Mail : hindustandailynews1@gmail.com

RELATED ARTICLES

Most Popular