Wednesday, February 18, 2026
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भवनों से नहीं, छात्रों को ज्ञान देने से होती है संस्थाओं की पहचान: सूर्यप्रताप शाही

मेरठ (हि.स.)। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने कहा कि किसी भी संस्था की पहचान भवनों से नहीं, बल्कि छात्रों को ज्ञान देने से होती है। इसलिए विज्ञानियों और प्रसार कार्यकर्ताओं को अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करनी चाहिए। बदलते मौसम को देखते हुए विज्ञानियों को ऐसी प्रजातियों का विकास करना चाहिए, जो जलवायु के अनुकूल हों।

मोदीपुरम स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि में उत्तर प्रदेश के कृषि विज्ञान केंद्रों (जोन-3) की 29वीं वार्षिक क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने किया। उन्होंने कहा कि विज्ञानियों के पास ज्ञान और अनुभव दोनों का समावेश कर एक विज्ञानी होने के नाते प्रयोगों को निरंतर आगे बढ़ाए, जिससे अनुसंधान के कार्यों को और गति प्रदान की जा सकें। विज्ञानी प्रोटोकॉल के अतिरिक्त स्वयं की प्रेरणा से अधिक से अधिक कार्य करें, जिससे तकनीकी ज्ञान को कम समय में किसानों के खेतों तक पहुंचाया जा सकें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हाईटेक नर्सरी का निर्माण किया गया है, जिसका फायदा किसानों को मिलेगा। प्रदेश सरकार ने एक करोड़ सब्जी नर्सरी के पौधों को वितरित करने का लक्ष्य उद्यान विभाग के सामने रखा है, जिसकी अभी तैयारी कर लक्ष्य को प्राप्त किया जाएगा। गौ आधारित प्राकृतिक खेती के प्रचार-प्रसार हेतु प्रत्येक केवीके पर मॉडल तैयार करना होगा, जिसे देखकर किसान अपना सकें।

कृषि मंत्री ने कहा कि पश्चिमी उप्र में सामान्य से कम बारिश हुई है। किसानों के हित में प्रदेश सरकार सूखाग्रस्त क्षेत्रों में 20 हजार सोल पंप और 2100 नए नलकूप लगाने जा रही है। इससे किसानों की फसलों को नष्ट होने से बचाया जा सकेगा।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद उपकार के अध्यक्ष कैप्टन विकास गुप्ता ने कहा कि आजादी के अमृत काल में अनुसंधान को तेजी से बढ़ाना होगा। इसमें महिला और पुरुषों की भागीदारी बढ़ानी होगी। जब तक उनका जुड़ाव कृषि से नहीं होगा, तब तक कृषि का विकास नहीं होगा। कृषि, किसान और उपभोक्ता को जोड़ना होगा, तभी किसानों की आमदनी बढ़ेगी। बढ़ती आबादी के लिए हमें तैयार रहना होगा।

उपकार के सचिव डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि पिछले 50 सालों में भारतीय कृषि ने बहुत प्रगति की है। जो देश में आयात होता था, उसे अब निर्यात किया जाता है। अन्य देशों को अनाज देकर उन्हें भुखमरी से बचा रहा है। आने वाले समय में भारतीय कृषि चुनौतियों के साथ खड़ी है। आने वाले 25 वर्षों में उत्पादन बढ़ाना होगा। जल, जमीन, जलवायु, जानवर और जंगल को बचाना होगा। विज्ञान को जनमानस तक ले जाने का कृषि विज्ञान केंद्र अच्छा केंद्र बनेंगे। केवीके को आधुनिक और उनकी दक्षता को बढ़ाना होगा। प्राइवेट सेक्टर के साथ मिलकर कार्य करना होगा।

उपकार के उप महानिदेशक डॉ. एके सिंह ने कहा कि कृषि के समग्र विकास के लिए उत्तर प्रदेश अच्छा कार्य कर रहा है। पानी, मिट्टी और वायुमंडल को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक खेती को प्राथमिकता के आधार पर कार्य करना होगा। अब फंड मेपिंग की पद्धति के आधार पर कृषि विज्ञान केंद्रों को सीधे पैसा मिलेगा। इस अवसर पर कृषि विवि के कुलपति प्रो. डीआर सिंह, उपकार महानिदेशक डॉ. संजय सिंह, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अटारी कानपुर के निदेशक डॉ. यूएस गौतम, विवि के निदेशक प्रसार डॉ. पीके सिंह, डॉ. एपी राव, प्रो. आरएस सेंगर, डॉ. एनके वाजपेयी, डॉ. एसएस सिंह, डॉ. एके सिंह, डॉ. डीके सिंह आदि उपस्थित रहे।

कुलदीप

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