लखनऊ (हि.स.)। अन्नकूट और गोवर्धन पूजा का त्योहार शुक्रवार को भक्तिभाव से मनाया जाएगा। यह त्योहार दीपावली के दूसरे दिन कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। इसमें भक्त मंदिरों और अपने घरों में अन्नकूट का उत्सव मनाते हैं। गोवर्धन पर्वत की पूजा होती है। इस त्योहार का सम्बंध भगवान श्रीकृष्ण से है। लखनऊ में यह अलीगंज स्थित नए हनुमान मंदिर, खाटू श्याम मंदिर और डालीगंज स्थित श्रीमाधव मंदिर में अन्नकूट महोत्सव मनाया जाता है।
यह त्योहार ब्रज क्षेत्र के मथुरा, बरसाना, गोकुल में बहुत हषोल्लास से मनाया जाता है। मथुरा के बांके बिहारी जी मंदिर में भगवान बांके बिहारी जी को 56 प्रकार के व्यजंनों का भोग अर्पित किया जाता है। काफी संख्या में भक्त इस दिन मथुरा में बांके बिहारी जी के दर्शन के लिए जाते हैं।
गोवर्धन पूजा में सुबह घरों में महिलाएं अपने घरों में गाय के गोबर से गोबर से पहाड़ बनाती हैं। इसमें पत्ते-फूल लगाकार पहाड़ की तरह बनाया जाता है। कहीं-कहीं भक्त मानव की आकृति का गोवर्धन बनाया जाता है। सुबह आंगन में पूजा होती है और शाम को सूर्यास्त के समय घर के मुहाने पर उसमें दीया जलाकर रखते है। इस समय ‘गोवर्धन चले गंगा नहाने‘ ऐसा बोलते हैं। अन्नकूट महोत्सव में भगवान श्रीकृष्ण के मंदिरों में भक्त 56 प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों से भगवान का भोग लगाते हैं। भक्त भजन-कीर्तन भी करते हैं।
गोवर्धन पूजा की कथा
पौराणिक ग्रथों के अनुसार द्वापरयुग में पहले देवताओं को इंद्र की पूजा होती थी। तब एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुल वासियों से कहा कि गोवर्धन पहाड़ की पूजा किया करों, गोवर्धन तो तुम्हारे द्वारा दिया भोग ग्रहण भी करेगा। इंद्र तो भोग ग्रहण करने आते नहीं है। तब गोकुलवासियों ने गोवर्धन की पूजा की और भोग अर्पित किया। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं वह भोग ग्रहण कर लिया। गोकुल वासियों को लगा कि गोवर्धन ने भोग स्वीकार किया। यह बात जब इंद्र को पता चली तो उसने क्रुद्ध होकर गोकुल में मूसलाधार वर्षा की। सात दिन तक लगातार वर्षा होती रही। भगवान ने गोवर्धन को अपनी ऊंगली पर उठा लिया। सारे ग्वाल-बाल, गाय, बछड़ों को भगवान ने गोवर्धन के नीचे कर लिया। जिससे उन पर वर्षा का प्रभाव नहीं पड़ा। तब ब्रह्मा जी ने इंद्र को भगवान श्रीकृष्ण की वास्तविकता के बारे बताया। तब इंद्र बहुत लज्जित हुए और जाकर भगवान से क्षमा याचना की। माना जाता है कि तभी से गोवर्धन पूजा की परंम्परा शुरू हुई है।
