Saturday, April 4, 2026
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 भगवान आदि विश्वेश्वर विराजमान केस में अब 8 नवम्बर को होगी सुनवाई

वाराणसी (हि.स.)। भगवान आदि विश्वेश्वर विराजमान का केस सुनवाई योग्य है या नहीं है, इस प्रकरण में गुरुवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन महेंद्र प्रसाद पांडेय की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनवाई की। अदालत ने प्रकरण में सुनवाई की अगली तिथि 08 नवम्बर नियत की है।

माना जा रहा है कि इस दिन अदालत अपना फैसला सुना सकती है। इस प्रकरण में हिंदू और मुस्लिम पक्ष की बहस 15 अक्टूबर को हुई थी। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 27 अक्टूबर नियत की थी। दाखिल प्रार्थना पत्र में ज्ञानवापी परिसर को मंदिर बताते हुए हिन्दू पक्ष ने वहां मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक, परिसर हिंदुओं को सौंपने व वहां मिले शिवलिंग के दर्शन.पूजन की मांग की है। वादी पक्ष के अधिवक्ताओं मानबहादुर सिंह, शिवम गौड़ और अनुपम द्विवेदी ने दलीलें पेश की।

प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता मुमताज अहमद, तौहीद खान, रईस अहमद, मिराजुद्दीन खान और एखलाक खान ने कोर्ट में प्रति-उत्तर में सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रार्थना पत्र में ज्ञानवापी परिसर में मस्जिद होने की बात वादी पक्ष ने स्वीकार की है। ऐसे में वहां मस्जिद का होना साबित होता है। प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि मुकदमे के वादी आदि विश्वेश्वर हैं और उनको अवयस्क बताकर उनका मुकदमा किरन सिंह लड़ रही हैं तो दो अन्य वादी विकास शाह व विद्याचंद्र इसमें क्या हैं। इस पर मंदिर पक्ष ने कहा कि यह मुकदमा आदिविश्वेश्वर का है। यह अधिकार उनको प्राप्त है कि मुकदमे में कौन रहेगा। विशेष धर्म स्थल स्थल विधेयक 1991 इस वाद में प्रभावी नहीं है। इसमें स्ट्रक्चर का पता नहीं कि मंदिर है या मस्जिद। जब इसमें ट्रायल होगा तभी पता चलेगा कि मस्जिद है या मंदिर। ट्रायल का अधिकार सिविल कोर्ट को है। अदालत में दोनों पक्षों ने अपनी.अपनी दलीलें पूरी कर ली हैं।

श्रीधर/दधिबल

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