Tuesday, March 3, 2026
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बड़ा फैसला : विवाहित पुत्री भी अनुकम्पा नियुक्ति की हकदार-हाईकोर्ट

राज्य डेस्क

बंगलुरू। कर्नाटक हाईकोर्ट ने शादीशुदा बेटियों को भी पिता की नौकरी पर दावा करने का फैसला दिया है। कोर्ट ने बेंगलुरु की निवासी भुवनेश्वरी वी. पुराणिक की याचिका पर यह फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक जीवन में जाने के बाद भी बेटियां परिवार के हिस्से के तौर पर ही रहती हैं। याचिकाकर्ता महिला के पिता अशोक अदिवेप्पा मादिवालर बेलगावी जिले के कुडुची में कृषि उत्पाद मार्केटिंग समिति के ऑफिस में सचिव के पद पर कार्यरत थे। सर्विस में रहते हुए 2016 में उनकी मृत्यु हो गई। प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रहे बेटे ने सरकारी नौकरी में दिलचस्पी नहीं दिखाई। बेटी ने पिता की जगह नौकरी के लिए आवेदन दिया तो विभाग के जॉइंट डायरेक्टर ने उसका आवेदन निरस्त कर दिया। भुवनेश्वरी ने इसे भेदभावपूर्ण करार देते हुए फैसले को अदालत में चुनौती दिया। कोर्ट ने कर्नाटक सिविल सेवा के तहत शादीशुदा बेटियों को परिवार के दायरे से बाहर किए जाने को अवैध, असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण करार दिया। साथ ही ऐसे नियम को भी खारिज कर दिया, जिसमें केवल अविवाहित बेटियों को ही परिवार का हिस्सा समझा जाता है। जस्टिस एम. नागाप्रसन्ना की बेंच ने कहा कि पिता की नौकरी पर दावे के लिए जब बेटे के वैवाहिक स्थिति का कोई फर्क नहीं पड़ता है, तब बेटी के वैवाहिक स्थिति का भी फर्क नहीं पड़ना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संबंधित विभाग में नौकरी देने का सरकार को निर्देश भी दिया।

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