Tuesday, April 7, 2026
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ब्रह्मोस-एनजी के परीक्षण अगले साल दिसंबर से शुरू होंगे, 2026 के मध्य तक वायु सेना को मिलेगी

– लड़ाकू विमान तेजस, मिग, राफेल और सुखोई-30 ब्रह्मोस-एनजी से लैस होंगे

– कई आसियान देशों समेत रूस, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका ने दिलचस्पी दिखाई

नई दिल्लीफरवरी (हि.स.)। सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की अगली पीढ़ी ब्रह्मोस-एनजी 2026 के मध्य तक भारतीय वायु सेना को मिल जाएगी। तब वायु सेना के लड़ाकू विमान तेजस, मिग, राफेल और सुखोई-30 ब्रह्मोस-एनजी से लैस होंगे। यह पहले से ज़्यादा छोटी और हल्की होगी, लेकिन दुश्मन पर अधिक भारी पड़ेगी। मिसाइल के परीक्षण अगले साल दिसंबर से शुरू होंगे और 2025 के अंत तक चलेंगे। कई आसियान देशों समेत संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, दक्षिण अमेरिका के कई देशों विशेषकर ब्राजील, पश्चिम एशियाई देशों और दक्षिण अफ्रीका ने मिसाइल प्रणाली के ब्रह्मोस-एनजी संस्करण खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है।

ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ अतुल दिनकर राणे ने बताया कि सुपरसोनिक क्रूज ब्रह्मोस मिसाइल की अगली पीढ़ी ब्रह्मोस-एनजी का एयर वेरिएंट विकसित और डिजाइन किए जाने की प्रक्रिया में है, इसलिए कंपनी 300 किलोमीटर की रेंज पर विचार कर रही है। मिसाइल के परीक्षण अगले साल दिसंबर से शुरू होंगे और 2025 के अंत तक चलेंगे। इसके बाद 2026 के मध्य तक यह मिसाइल भारतीय वायु सेना के फाइटर जेट तेजस, मिग, राफेल और सुखोई-30 में लैस होने के लिए तैयार होगी। रूसी एयरफोर्स भी इसे अपने पांचवीं पीढ़ी के सुखोई-57 जेट के अंतिम विकास के बाद खरीदेगी।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का फिलीपींस से 374 मिलियन डॉलर का सौदा होने के बाद अब अगली पीढ़ी की ब्रह्मोस-एनजी के बारे में आसियान सदस्य देशों की दिलचस्पी बढ़ने लगी है। भारत से ब्रह्मोस-एनजी खरीदने के लिए अब आसियान देश मलेशिया और इंडोनेशिया भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। आसियान सदस्य देशों में इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया हैं। इसके साथ ही संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, दक्षिण अमेरिका के कई देशों विशेषकर ब्राजील, पश्चिम एशियाई देशों और दक्षिण अफ्रीका ने मिसाइल प्रणाली के ब्रह्मोस-एनजी संस्करण में अपनी रुचि व्यक्त की है।

अत्याधुनिक ब्रह्मोस-एनजी के प्रति कई देशों की दिलचस्पी बढ़ते देखकर उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) में इसका उत्पादन शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। पूर्व वायु सेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया को यूपीडीआईसी का मुख्य नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। यहां अगले तीन साल में (2025 तक) ब्रह्मोस-एनजी का निर्माण शुरू किये जाने की योजना है। शुरू में 100 से अधिक मिसाइलों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया गया है, लेकिन पांच से सात साल में 900 करोड़ रुपये की मिसाइलों के उत्पादन का लक्ष्य है। इस बाबत डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) और रशियन कंपनी एनपीओएम के बीच मेमोरंडम ऑफ अंडरटेकिंग (एमओयू) हो चुका है। ये कंपनियां शुरू में 300 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी।

ब्रह्मोस-एनजी मौजूदा सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का एक छोटा संस्करण है। यह पहले से ज़्यादा छोटी और हल्की होगी, लेकिन दुश्मन पर अधिक भारी पड़ेगी। इसे ग्राउंड-बेस्ड, एरियल, सरफेस और अंडरवाटर-बेस्ड प्लेटफॉर्म पर तैनात करने के लिए बनाया जाएगा। मिसाइल की लंबाई छह मीटर, व्यास 50 सेंटीमीटर और इसका वजन 1.6 टन है। पहले वाले संस्करण का वजन 3 टन था और उसकी लम्बाई 9 मीटर थी। मिसाइल की मारक क्षमता 290 किमी. और यह 3.5 मैक की गति से उड़ सकती है। ब्रह्मोस-एनजी में कम रडार क्रॉस सेक्शन (आरसीएस) है, जिससे दुश्मन की वायु रक्षा प्रणालियों को इसकी भनक तक नहीं मिलेगी। नई मिसाइल में स्वदेशी एईएसए रडार भी होगा।

सुनीत/पवन

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