– दिल्ली रोड व कांठ रोड पर सुबह से लेकर देर रात्रि तक डीजे संग कांवड़ियों का होता रहा आवागमन
– कांवड़ बेड़ों के स्वागत में दिल्ली रोड और कांठ रोड पर सजे भंडारे, लगी झांकियां
– सावन मास के आखिरी सोमवार पर शिवालयों में जलाभिषेक कर पूरा करेंगे संकल्प
मुरादाबाद (हि.स.)। सावन मास के आखिरी सोमवार के मद्देनजर दिल्ली रोड व कांठ पर रविवार को कांवड़ियों का सैलाब उमड़ा। ब्रजघाट और हरिद्वार से डेढ़ लाख से अधिक कांवड़िये कावड़ भरकर मुरादाबाद पहुंचे। ब्रजघाट (गढ़ गंगा) और हरिद्वार से कांवड़ बेड़े आज तड़के से ही आना शुरू हो गए थे जिनके विशालकाय डीजे से गूंजते भक्ति संगीत पर लोग झूमने को मजबूर हो गए। दिल्ली रोड पर हर जत्थे के डीजे में एक दूसरे से अधिक आवाज से गूंजने की होड़ लगी रही। दिन बढ़ने के साथ ही बेड़ों का रेला भी बढ़ता गया। दोपहर तक यह चरम पर पहुंच गया। ऐसा लगने लगा कि मानो पूरा शहर शिवभक्ति रूपी सागर में समा गया हो। वहीं हरिद्वार से भी शिवभक्त कांवड़ लेकर आए।
सावन मास के आखिरी सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए ब्रजघाट से गंगाजल लाने वाले कांवड़ियों और कांवड़ बेड़ों का सैलाब उमड़ा। वैसे तो रातभर बेड़े आते रहे। इनकी भीड़ देख दोनों ओर से वाहनों का संचालन बंद कर बेड़ों को आगे बढ़ाया गया। यह सिलसिला शाम तक चलता रहा। श्री बालाजी सेवा समिति के बेड़े के साथ तो दर्जनभर से अधिक झांकियां भी शामिल रहीं। उधर कांठ रोड पर भी यही स्थिति रही। इस रोड पर भी रात भर बेड़े गुजरते रहे। दिन बढ़ने के साथ इनका आना भी बढ़ता गया। रामपुर, मूंढापांडे, चंदौसी, डिलिया आदि क्षेत्रों के बेड़े यहां से निकले। खास बात यह रही कि इस बार शहर के भी सौ से अधिक बेड़े हरिद्वार से जल लेकर आए। जिनकी धूम रही। इनके डीजे से बहते भक्ति संगीत ने हर किसी को शिवभक्ति से सराबोर कर दिया। अधिक बेड़ों के आने के कारण यहां भी रास्ते को वनवे करना पड़ा।
बेड़ों के साथ आने वाले कावंड़ियों की आगवानी करने के लिए उनके परिजनों की भीड़ भी उमड़ रही थी। दिल्ली रोड पर दूर तक भंडारे भी सजे हुए थे। कांवड़ियों की सेवा और उनकी भोजन आदि की व्यवस्था के लिए भंडारों की कतार लगी रही। लाइनपार, कांठ रोड पर अगवानपुर तक और दिल्ली रोड़ पर पाकबड़ा से आगे तक शहर के भंडारे लगे। यहां कांवड़ियों को आकर्षित करने के भी भरपूर प्रयास होते रहे। दर्जनों भंडारे ऐसे रहे जिन पर कलाकारों द्वारा शिव तांडव, पार्वती-शिव नृत्य, राधा कृष्ण का नृत्य, रास लीला आदि का मंचन किया जाता रहा। कांवड़ियों को स्वरुचि भोजन कराने के लिए खीर, छोले-चावल, आलू-पूरी, हलुआ, मूंग की दाल का हलुआ, केले सहित अनेक फल, बिस्कुट, पॉपकोन आदि भी बांटे जाते रहे। कई भंडारों पर तो भोजन खत्म तक हो गया। मगर उन्होंने जल्दी ही दोबारा भोजन तैयार करवा लिया। कुछ भंडारे तड़के से ही आरंभ हो गए तो कुछ दिन बढ़ने के साथ शुरू हुए। अधिकांश देर शाम तक चलते रहे। इस बार समाज सेवी संस्थाओं के साथ राजनीतिक और धार्मिक संगठनों ने भी भंडारों का आयोजन किया। अनेक निर्यातकों ने भी भंडारे लगवाए। नर्सिंग होम की ओर से भी सेवा शिविर लगाए गए।
कड़ी सुरक्षा के बीच शिव मंदिरों में जलाभिषेक तड़के शुरू होगा :
सावन मास के अंतिम सोमवर पर कड़ी सुरक्षा के बीच शिव मंदिरों में जलाभिषेक तड़के शुरू होगा। भारी संख्या में कांवड़िए गंगाजल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचे हैं। रविवार को दिनभर कांवड़ियों का आना जाना जारी रहा। शहर के प्रमुख मंदिरों में सुरक्षा व्यवस्था की गई। मंदिरों पर मजिस्ट्रेट तैनात कर दिए गए हैं।
जिला प्रशासन ने देर रात्रि तक मंदिरों के आसपास सारी व्यवस्था मुकम्मल की। सावन के आखिरी सोमवार को भारी संख्या में शिव भक्त जलाभिषेक करने पहुंचे हैं। मुरादाबाद के सिद्ध पीठ चौरासी घंटा और झारखंडी शिव मंदिर में सबसे ज्यादा श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं। इस लिहाज से यहां सीओ मजिस्ट्रेट समेत भारी फोर्स तैनात की गई है। चौरासी घंटा और झारखंडी शिव मंदिर में रात से ही कांवड़िए जलाभिषेक इंतजार में डट जाएंगे और तड़के साढ़े तीन या चार बजे से जलाभिषेक शुरू होगा।
निमित जायसवाल/सियाराम
