Saturday, February 14, 2026
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 (बॉलीवुड के अनकहे किस्से) शशिकलाः नायिका, सहनायिका,खलनायिका से दादी-अम्मा तक का यादगार सफर

अजय कुमार शर्मा

अभिनेत्री शशिकला का जीवन बिल्कुल फिल्मों की तरह ही रोचक, संघर्षपूर्ण और यादगार रहा है। कुछ व्यक्तिगत त्रासदियों के कारण उनका फिल्मी करियर दो बार लंबे समय के लिए टूटा भी, लेकिन वह बार-बार नई संजीवनी लेकर उठ खड़ी हुईं। उन्होंने पहले एक्स्ट्रा, फिर सहनायिका, नायिका, खलनायिका से लेकर मां, दादी तक के रोल करके लंबे समय तक हिंदी सिनेमा में अपनी सार्थक उपस्थिति बनाए रखी।

शशिकला का जन्म 1933 में महाराष्ट्र के शोलापुर में हुआ था। उनके पिता कपड़ों के संपन्न व्यापारी थे लेकिन पारिवारिक कारणों से उन्हें इस व्यापार में बहुत बड़ा घाटा उठाना पड़ा। इन विपरीत परिस्थितियों में शशिकला को बंबई (मुंबई) आना पड़ा। उस समय वह हाईस्कूल में पढ़ रही थीं । उन्हें पहला अवसर 1946 की फिल्म जीनत में मिला। इसके निर्माता निर्देशक शौकत हुसैन थे। शौकत, गायिका नूरजहां के पति थे। जीनत में उन्हें उस समय की मशहूर कव्वाली-आहें न भरी, शिकवे न किए, कुछ भी न जुबां से काम लिया-में अवसर दिया गया था। इस कव्वाली में श्यामा भी उनके साथ थी।

यह कव्वाली बहुत लोकप्रिय रही। इस कव्वाली से श्यामा तो जल्द ही स्टार बन गईं लेकिन शशिकला को कोई खास फायदा नहीं हुआ। वह विभिन्न फिल्मों में छोटे-मोटे रोल करती रहीं। कुछ समय बाद रणजीत पिक्चर्स के चंदूलाल शाह ने उन्हें नजारे फिल्म में नायिका का रोल दिया। इसके बाद केदार शर्मा ने फिल्म ठेस में उन्हें नायिका बनाया और व्ही .शांताराम ने सुरंग और तीन बत्ती चार रास्ता में उनको बेहतर रोल दिए , लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि यह फिल्में बहुत ज्यादा सफल नहीं हुई । थक-हार के उनको फिर सहनायिका के रूप में ही फिल्मों में काम करना पड़ा। बहुत समय बाद राजश्री की फिल्म आरती में उनको एक बुरी औरत का रोल मिला और इससे शशिकला को एक नई पहचान और लोकप्रियता मिली।

आरती में मीना कुमारी भी थीं। बाद के समय में उन्होंने अशोक कुमार के साथ समाज, बीआर चोपड़ा की कानून और विमल राय की सुजाता तथा हमराही में उल्लेखनीय किरदार निभाए । ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म अनुपमा में उन्होंने एक अल्हड़ लड़की का दमदार रोल निभाया था। धर्मेंद्र-मीना कुमारी की चर्चित फिल्म फूल और पत्थर में हेलन के साथ उनका कैबरे डांस भी था। नृत्य में अच्छी तरह प्रशिक्षित न होने के बाद भी उन्होंने फिल्म पटरानी में वैजयंती माला के साथ और जवान मोहब्बत में सायरा बानो के साथ नृत्य करके अपनी योग्यता को प्रमाणित किया था। शशिकला की अन्य लोकप्रिय फिल्में थीं वक्त, गुमराह, नीलकमल, तीन बहुरानियां, हमजोली जिसमें उन्होंने चुलबुले किरदार निभाए। इसके बाद शतरंज, पैसा और प्यार के बाद वे अचानक बिना कुछ कहे फिल्मों से गायब हो गईं।

दरअसल इस बीच वे दूसरा विवाह कर विदेश चली गई थीं। लेकिन इसमें मिली विफलता के कारण उनके अंदर वैराग्य भाव आ गया। भारत वापस आकर वे चारधाम की यात्रा पर निकल गईं और कई साधु-संतों के आश्रम आदि में रहीं लेकिन अंत में मदर टेरेसा के आश्रम में उन्हें सुकून मिला और वह वहीं सेवा कार्य करने लगीं। मन स्थिर होने के बाद दोबारा उनकी वापसी फिल्मों में हुई और अपने अंतिम दौर में उन्होंने बादशाह (1999), उलझन (2001), चोरी चोरी (2003 ) और मुझसे शादी करोगी (2024), कभी खुशी कभी गम में अम्मा जी आदि के रोल किए। विज्ञापन फिल्म, टीवी धारावाहिकों में भी वे लगातार काम करती रहीं। इतना ही नहीं वह मराठी फिल्में भी लगातार सक्रिय रहीं और लोकप्रिय भी ।

चलते-चलते

शशिकला ने पहला विवाह ओमप्रकाश सहगल नामक व्यवसायी से किया था। वह उनके पड़ोसी थे। उन्होंने शशिकला को हीरोइन बनाने के लिए करोड़पति नामक एक फिल्म भी बनाई थी, जिसके नायक किशोर कुमार और खलनायिका कुमकुम थीं। निर्देशक मोहनलाल सहगल थे और संगीत शंकर-जयकिशन ने दिया था। फिल्म फ्लॉप रही। उन्होंने दूसरा विवाह ऑस्ट्रेलिया के एक व्यक्ति से किया लेकिन वह सफल नहीं रहा और उनको भारत लौटना पड़ा। फिल्म जगत में उनके व्यापक योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2007 में पद्मश्री की उपाधि से विभूषित किया। चार अप्रैल 2021 को 88 वर्ष की आयु में शशिकला इस दुनिया से विदा हो गईं।

(लेखक, वरिष्ठ कला एवं साहित्य समीक्षक हैं।)

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