-भारतीय स्टेट बैंक अनुसूचित जाति व जनजाति कर्मचारी कल्याण महासंघ की हुई बैठक
लखनऊ (हि.स.)। भारतीय स्टेट बैंक अनुसूचित जाति व जनजाति कर्मचारी कल्याण महासंघ, लखनऊ सर्कल की बैंक में एससी एसटी के कर्मचारियों के उत्थान से जुड़े मुद्दों पर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक लखनऊ के होटल ताज में डॉ. अंजू बाला, सदस्य, एनसीएससी, नई दिल्ली, की उपस्थिति में आयोजित हुई। इसमें लखनऊ सर्कल द्वारा कई बिंदु सामने रखे गए। डॉ0 अंजू बाला ने संघ द्वारा उठाये गए सभी बिंदुओं को सुना और इन सभी मुद्दों को जिम्मेदार अधिकारियों के समक्ष रखने का आश्वासन दिया।
भारतीय स्टेट बैंक अनुसूचित जाति व जनजाति कल्याण महासंघ ने बैंक की केंद्रीय बोर्ड में एससी एसटी प्रतिनिधित्व की मांग की है। अपनी मांग में संघ ने बताया कि बैंक में अनुसूचित जाति व जनजाति और ओबीसी के कुल कर्मचारियों का 49.73 प्रतिशत है मगर अभी तक भारतीय स्टेट बैंक के गठन के बाद से किसी भी अनुसूचित जाति व जनजाति के अधिकारी या स्टाफ के सदस्य को कभी भी एसबीआई के केंद्रीय बोर्ड में निदेशक के रूप में नियुक्त नहीं किया गया है। इसके साथ ही एसबीआई में एससी अधिकारियों के डीजेएम और उससे ऊपर के पदों पर प्रतिनिधित्व केवल 3.82 प्रतिशत और एसटी अधिकारियों का प्रतिनिधित्व केवल 1.61 प्रतिशत है, जबकि बैंक में लगभग 26.34 प्रतिशत एससी व एसटी अधिकारी है ।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय जिसमें आरक्षित रिक्तियों के विरुद्ध एक राज्य से दूसरे राज्य में अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के प्रवास को रोकने का फैसला दिया गया था, इसके बावजूद बैंक द्वारा अपने लिपिक ग्रेड रोजगार में आरक्षित रिक्तियों के खिलाफ उम्मीदवारों को एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित करने की अनुमति दे रहा है, इस पर भी रोक लगाने की मांग संघ द्वारा की गई है।
संघ ने इस मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया कि एसबीआई अपने मुनाफे का महज 2 प्रतिशत ही सीएसआर गतिविधियों में खर्च करता है। प्रत्येक सर्कल द्वारा भी यह किया जाता है मगर बैंक के पास एससी एसटी समुदाय के उत्थान लिए कोई विशेष योजना नहीं है, जबकि इंडियन ऑयल जैसे संस्थान एससी एसटी के कर्मचारियों के स्तर में सुधार के लिए आवासीय कोचिंग तथा अन्य गतिविधियां करते हैं।
इसके साथ ही बैंक द्वारा समाज में रोजगार बढ़ाने की जगह आउटसोर्सिग के जरिए बैंक में ग्रुप डी के पदों पर भर्ती से न सिर्फ आरक्षण के नियमों की अवहेलना हो रही है बल्कि बड़े पैमाने पर लोगों से अच्छा जीवन व्यतीत करने की सुविधा से भी वंचित रखा जा रहा है, इसलिए बैंक से आउटसोर्सिग की व्यवस्था खत्म होनी चाहिए।
उपेन्द्र
