Friday, February 13, 2026
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बेटियां भारतीय संस्कृति की राजदूत : इंद्रेश कुमार

– बनारस बेटी अधिवेशन का किया वर्चुअल उद्घाटन,108 बेटियों ने की सहभागिता

वाराणसी (हि.स.)। अन्तरराष्ट्रीय बेटी दिवस पर रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार ने कहा कि बेटियां भारतीय संस्कृति की राजदूत हैं। हजारों वर्षों से भारतीय संस्कृति एवं उसके मूल्यों को बचाये रखने में बेटियों की बड़ी भूमिका है। इन्द्रेश कुमार ने लमही इन्द्रेश नगर स्थित सुभाष भवन में आयोजित बनारस बेटी अधिवेशन का वर्चुअल उद्घाटन किया।

अधिवेशन में इंद्रेश कुमार ने कहा कि इस्लाम कहता है कि मां के कदमों में जन्नत है। जो बेटियों का सम्मान नहीं करते वे राक्षसी प्रवृत्ति के होते हैं। इसलिये भारत में प्रचलित कुप्रथा तीन तलाक को खत्म करने में हमने पूरी ताकत लगा दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के क्षेत्र से अब यह नारा गूंजेगा “बधाई हो, बधाई हो, बेटी हुयी है।

अधिवेशन में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय इतिहास विभाग की प्रोफेसर डा० मृदुला जायसवाल ने कहा कि बेटियों के लिये सबसे बड़ी जरूरत सामाजिक भय से मुक्ति दिलाना है और यह मुक्ति रिश्तों के मजबूत होने से ही मिल सकती है। मुस्लिम आक्रमण के बाद बेटियों को घर में कैद करने की कुप्रथा विकसित हुयी जो आज भी सामाजिक भय की वजह से प्रथा में बदल गयी है।

उन्होंने कहा कि बेटियों को अवसर मिलेगा तो समाज और राष्ट्र को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगी। लक्ष्मी बाई, बेगम हजरत महल, सुल्ताना रजिया, दुर्गा भाभी आदि भारत की महान बेटियां हैं जिन्होंने विपरीत परिस्थिति में भी स्वयं को साबित किया। सम्मेलन में अपर पुलिस आयुक्त सुभाष चन्द्र दूबे ने 09 बेटियों को “देश सेवा प्रमाण पत्र” देकर सम्मानित किया और 13 बेटियों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र दिया।

इस अवसर पर सुभाष चंद्र दूबे ने कहा कि संस्कृति में महिलाओं को बराबरी का स्थान दिया गया है। आज कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है जो बालिकाओं से अछूता हो। जिनके अन्दर दृढ़ इच्छा शक्ति हो वो अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकती हैं। अधिवेशन को विशाल भारत संस्थान के संस्थापक डॉ राजीव श्रीवास्तव, राष्ट्रीय महासचिव अर्चन भारतवंशी, मुस्लिम महिला फाउण्डेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी,अग्रसेन कॉलेज की अंजू श्रीवास्तव आदि ने भी विचार रखें। अधिवेशन में कुल 54 रिश्तों का अधिवेशन कराया जायेगा, जिसमें मामा, मामी, चाचा, चाची, बुआ, फूफा, साला, साली जैसे रिश्ते शामिल हैं। बनारस बेटी अधिवेशन में 09 प्रस्ताव पारित किये गये। कार्यक्रम में 108 बेटियों ने भाग लिया।

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