Saturday, April 11, 2026
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बुंदेलखंड एक्सप्रेस का नाम बदलकर वीरांगना एक्सप्रेस रखने की मांग

वीरांगना बेटी महारानी लक्ष्मीबाई की जयंती उत्साह के साथ मनाई गई

वाराणसी(हि.स.)। काशी की वीरांगना बेटी महारानी लक्ष्मीबाई की 186वीं जयंती शुक्रवार को भदैनी स्थित जन्मस्थली पर उत्साहपूर्ण माहौल में मनाई गई। महारानी लक्ष्मीबाई जन्मस्थली स्मारक समिति और सामाजिक संस्था जागृति फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में बतौर मुख्य अतिथि श्री संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र ने महारानी के शौर्य और बलिदान को नमन किया।

इस दौरान प्रो. मिश्र ने कहा कि झांसी की रानी काशी की बेटी थी। हमें बहुत ही गर्व है की वह हम लोग के मोहल्ले की थी। आज उनकी जन्मस्थली आकर गर्व की अनुभूति हो रही है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में जो अपना अमूल्य योगदान दिया, उसको हम शब्दों में वर्णन नहीं कर सकते। रानी लक्ष्मीबाई के बताए हुए रास्ते पर चलकर ही आज देश स्वतंत्र हुआ और हमें इस महिला वीरांगना पर गर्व है।

विशिष्ट अतिथि बीएचयू राजनीति शास्त्र विभाग के डीन प्रो. कौशल किशोर मिश्र ने कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई ने झांसी में अंग्रेजों के सामने समर्पण करने से मना करते हुए कहा था कि जिंदा रहते हुए अपनी झांसी किसी को नहीं दूंगी। उसी का परिणाम रहा कि हमारा देश आज स्वतंत्र हुआ और हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं। फाउंडेशन के महासचिव रामयश मिश्र ने वाराणसी से बुंदेलखंड को जाने वाली बुंदेलखंड एक्सप्रेस का नाम बदलकर उसका नाम वीरांगना एक्सप्रेस रखने की मांग की।

रामयश ने कहा कि महारानी के जन्मस्थली से लेकर उनकी शहीद स्थली तक यह ट्रेन जाती है। इसलिए इसका नाम वीरांगना एक्सप्रेस होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपील है कि मांग को पूरा कर महारानी के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करें।

कार्यक्रम के शुरूआत में अतिथियों ने महारानी के विशाल प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किया। इसमें प्रभुदत्त त्रिपाठी, हृदय नारायण मिश्र, राजेश मिश्रा, सत्यांशु जोशी, प्रताप बहादुर सिंह,हरिनाथ गौड़ आदि ने भागीदारी की।

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