– न्यूनतम समर्थन मूल्य से वंचित रह सकते हैं किसान
– अधिकतर किसान अनभिज्ञ, खरीद लक्ष्य पूरा कर पाना आसान नहीं
मीरजापुर (हि.स.)। धान खरीद नीति में हाइब्रिड धान को लेकर किए गए प्रावधान से किसानों के साथ-साथ क्रय केंद्र प्रभारियों की भी चिंता बढ़ गई है। धान लेकर क्रय केंद्र पर पहुंचने वाले किसान से पहले हाइब्रिड बीज खरीदने का प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है। प्रमाण पत्र रहेगा तो धान की खरीद होगी अन्यथा किसान को वापस जाना होगा। जिले के अधिकतर किसानों के पास बीज खरीद का प्रमाण पत्र नहीं है। कई दिनों से खराब मौसम के कारण क्रय केंद्रों पर धान की आवक कम हो रही है। जैसे ही किसानों की आवक बढ़ेगी इस समस्या को लेकर केंद्रों पर विवाद भी हो सकता है।
ये है नीति
धान खरीद नीति में हाइब्रिड धान बेचने के लिए उसका बीज खरीदने की मूल रसीद यानी बीज प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है। गत वर्ष तक एक घोषणा पत्र भरकर काम चल जाता था। खाद्य विभाग के अधिकारियों के पास इस तरह ही समस्या पहुंच रही है। कुछ किसान हाइब्रिड धान लेकर केंद्र पर पहुंच रहे हैं, लेकिन उनसे धान की खरीद नहीं हो रही। केंद्र प्रभारियों का कहना है कि जब तक प्रमाण पत्र को आनलाइन फीड नहीं किया जाएगा, धान नहीं खरीद सकते। ऐसे में बड़ी संख्या में किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य से वंचित रह सकते हैं।
45 प्रतिशत है हाइब्रिड धान का उत्पादन, 35 प्रतिशत ही होगी खरीद
अधिक पैदावार की दृष्टि से किसान हाइब्रिड धान बोना पसंद करते हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में इस धान का उत्पादन कुल पैदावार का 45 प्रतिशत है। सरकार ने क्रय केंद्रों से अधिकतम 35 प्रतिशत हाइब्रिड धान खरीदने का लक्ष्य रखा है। किसान धान का बीज ब्लाक से लेते हैं तो वहां रजिस्टर में नाम नोट कर बीज दे दिया जाता है। निजी दुकानों से उन्हें पक्की रसीद शायद ही मिलती है। यदि रसीद ली भी हो तो उसे खरीद शुरू होने तक संभालकर रखना भी मुश्किल है। जिले में अभी भी अधिकतर किसान सरकार की इस नीति से अनभिज्ञ हैं। आशंका जताई जा रही है कि यदि नीति में बदलाव नहीं हुआ तो खरीद का लक्ष्य पूरा कर पाना आसान नहीं होगा।
अब तक 20,006.88 टन हुई धान की खरीद
जिले भर के 3147 किसानों से अब तक 20,006.88 टन धान की खरीद की गई है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी धनंजय सिंह ने बताया कि हाइब्रिड धान की खरीद को लेकर जो नीति बनाई गई है, उसका अनुपालन किया जा रहा है।
संस्थाओं के पास पर्याप्त धन, फिर भी 748.59 लाख का भुगतान शेष
किसानों को देय भुगतान 4367.01 लाख के सापेक्ष 3618.42 लाख का भुगतान किया गया है, जो 82.86 प्रतिशत है। वर्तमान में 748.59 लाख का भुगतान शेष है, जो पीएफएमएस स्वचालित आनलाइन प्रक्रिया के चलते है।
कड़ी निगरानी के बीच 14,301.52 टन धान मिलों के हवाले
जिला खाद्य विपणन अधिकारी धनंजय सिंह ने बताया कि संस्थाओं के पास पर्याप्त धनराशि है। खरीदे गए 20,006.88 टन के सापेक्ष 71.48 प्रतिशत लगभग 14,301.52 टन धान कड़ी निगरानी के बीच मिलों को भेजा जा चुका है। अब तक 23047 किसानों ने पंजीयन कराया है और 16484 पंजीकरण सत्यापित किया जा चुका है।
किसानों का कहना है कि हाइब्रिड धान का बीज खरीदते हुए आमतौर पर रसीद नहीं मिलती है। इस बात की किसी को जानकारी भी नहीं थी कि धान बेचने में इसकी जरूरत पड़ेगी। सरकार को इस नीति पर विचार करना चाहिए। कोई भी नई नीति बने तो उसका प्रचार-प्रसार कराना चाहिए। हम सीधे क्रय केंद्र पहुंचेंगे तब हमसे प्रमाण पत्र मांगा जाएगा। ऐसा शायद ही कोई किसान हो, जिसके पास प्रमाण पत्र होगा।
अधिकारी बोले, समस्या आएगी तो निराकरण भी होगा
जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने बताया कि हाइब्रिड धान खरीद को निर्देशों का पालन किया जा रहा है। अभी तक कोई समस्या संज्ञान में नहीं आई है। यदि किसानों को कोई समस्या आएगी तो उसका निराकरण किया जाएगा।
कमलेश्वर शरण/सियाराम
