कानपुर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में मानसून की वापसी से खासकर बुन्देलखण्ड और मध्य क्षेत्र में बीते तीन दिन से बारिश हो रही है। इस बारिश से जहां तापमान गिरने से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली तो वहीं फसल के लिए वरदान साबित हो रही है। खेतों में खड़ी फसलें जो मुरझाने की स्थिति में पहुंच गईं थीं वह अब लहलहाने लगी और किसान खुश दिख रहे हैं। किसानों का कहना है कि अभी दो से तीन दिन मौसम अगर ऐसा बना रहे तो आगामी फसल भी बेहतर हो जाएगी।
खरीफ की फसल के लिए अगस्त और सितम्बर में बारिश होना बहुत जरूरी होता है लेकिन इस सीजन में अगस्त माह लगभग पूरी तरह से सूखा रहा। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 122 सालों में यह पहला ऐसा साल रहा जिसमें सबसे कम बारिश हुई। इसके बाद सितम्बर माह में बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र विकसित होने लगा, जिससे मौसम विभाग बारिश का पूर्वानुमान करने लगा और बीते तीन दिनों से उत्तर प्रदेश में मानसून सक्रिय हो गया।
इससे कानपुर सहित मध्य क्षेत्र और बुन्देलखण्ड में अच्छी बारिश हो रही है और तापमान भी गिर गया। इससे लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिल सकी है। हो रही बारिश से लहलहाती फसलों को देख सबसे अधिक किसान खुश नजर आ रहे हैं।
बांदा के पपरेंदा निवासी किसान श्रीराम त्रिवेदी, महोखर के दिनेश सिंह और पल्हरी के रामचन्द्र पटेल का कहना है कि इस बारिश ने उनकी धान की फसल में संजीवनी का काम किया है। ज्वार और बाजरा समेत मूंग और तिल की फसल को भी लाभ होगा। यही नहीं दो तीन दिन और मौसम ऐसा ही रहता है तो रबी की फसल की बुवाई भी बेहतर ढंग से की जा सकेगी।
कानपुर के घाटमपुर निवासी आरपी सचान, राजेन्द्र सिंह आदि ने बताया कि पिछले माह अच्छी बारिश न होने से धान, बाजरा आदि की फसलें खराब हो रही थीं। आज तेज बारिश होने से धान, बाजरा आदि की फसलों को संजीवनी मिली है।
बिल्हौर निवासी देवेन्द्र कटियार, चौबेपुर के रामजी दुबे ने बताया कि यह बारिश आलू की अगैती फसल करने वालों के लिए बहुत लाभकारी साबित होगी। आलू किसानों को अब आलू बुआई के लिए खेत तैयार करने के लिए परेवा नहीं करना पड़ेगा। खेतों में पानी के अभाव में सूख रहीं अन्य फसलों के लिए आसमान से झर रहीं बूंदे अमृत का काम कर रही हैं। जन्माष्टमी की पूर्व संध्या से हो रही बारिश से किसानों के चेहरे पर रौनक लौट आई है।
अजय/दीपक/दिलीप
