लखनऊ(हि.स.)। एक ही जिले में कहीं तेज बारिश तो कहीं पर आसमान से एक बूंद भी नहीं। ऐसी स्थिति में जिलों के बारिश के आंकलन के आधार पर वहां की खेती के लिए सलाह देना भी उपयुक्त नहीं हो पा रहा है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। अब हर ब्लाक का आकलन करने की व्यवस्था उप्र सरकार बना रही है लेकिन वह अभी तक हर जगह सुचारू रूप से शुरू नहीं हो पाया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव है। भविष्य में और परेशानी बढ़ सकती है।
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान के पूर्व निदेशक डाॅ. जे.पी. गुप्ता का कहना है कि इस तरह की अनियमितता भविष्य में और अधिक बढ़ने की संभावना है। मृदा, जल और वायु में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, जिससे प्रकृति भी प्रभावित हो रही है। प्रकृति जब प्रभावित होगी तो निश्चय ही तापमान, वर्षा की स्थिति में अनिश्चितता आएगी। इसके दुश्प्रभाव होंगे। प्रदूषण का प्रभाव एक दिन में सामने नहीं आता। यह धीरे-धीरे बढ़ता है और लोगों की परेशानी बढ़ती जाती है।
कृषि विशेषज्ञ डाॅ. ए.के. सिंह का कहना है कि मौसम की अनिश्चितता किसानों की परेशानी बढ़ाता जा रहा है। पूर्वानुमान भी सही नहीं बैठ रहे। एक ही जिले में कहीं अधिक बारिश तो कहीं पर सूखा जैसी स्थिति हो जाती है। ऐसी स्थिति में किसानों को सही सलाह देना भी मुश्किल हो गया है।
उपेन्द्र/दिलीप
