Sunday, April 12, 2026
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बाराबंकी : हुर के मुकद्दर का सूरज पहले उभर कर सामने आया


बाराबंकी । कर्बला में दुनियां का सूरज बाद में नजर आया, हुर के मुकद्दर का सूरज पहले उभर कर सामने आया। दीनी मुसतकिबल को नजर में रखकर अपने बच्चों को कामयाब बनाओ। आयत हर दौर में अपने टारगेट को ढूंढती है, अपने को ऐसा बा किर्दार बनाओ कि आयत के मिस्दाक बन जाओ। यह बात मौलाना गुलाम अस्करी हाल में मरहूम सै. नजमुल हसन रिजवी इब्ने सै. शब्बर हुसैन रिजवी मरहूम की मजलिस को खिताब करते हुये मौलाना सै. हैदर महदी ने कही। उन्होंने यह भी कहा कि मालो दौलत शोहरत और पावर को छोड़कर हक की तरफ कदम बढ़ाने को बहादुरी कहते हैं। दुनियां में हर इन्सान घाटा उठाने वाला है सिवाय उसके जो हक की वसीयत करे और सब्र की तलकीन करे। आखिर में करबला वालों के मसायाब पढ़े जिसे सुनकर सभी रो पड़े। मजलिस से पहले डा. रजा मौरान्वी ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा यूं तो हर रोज पढ़ा करते हैं कुरआने करीम, गौर जब उसपे किया शह का कसीदा निकला। हमने औलादे नबी को भी बहकते देखा, हुर मुबारक तुझे बेटा तेरे जैसा निकला। कशिश सन्डीलवी ने भी अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा -गमों में डूबकर पढिये अजब फसाना है कि साजगारे वफा कब यहां जमाना है। सुहेल बस्तवी ने भी बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा-होता है एखलाक से ही आदमीयत का वजूद,और उस एखलाक के तुम आईना नजमुल हसन। अज््मी बाराबंकवी ने अपने बेहतरीन अन्दाज में कलाम पेश करते हुए पढ़ा-एक गुलामे हैदरे कर्रार थे नजमुल हसन,वाकई में खुल्द के हकदार थे नजमुल हसन। दानिश रिजवी व बच्चों ने भी नजरानए अकीदत पेश किया। मजलिस का आगाज तिलावते कलामे पाक सदानीश रिजवी ने किया।बानिये मजलिस ने सभी का शुक्रिया अदा किया।

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