– काशी विश्वनाथ धाम में मुख्यमंत्री ने माता के पालकी को खुद उठाया,उनका ये रूप देख काशी गदगद,गूंजा हर-हर महादेव का जयकारा
वाराणसी (हि.स.)। कनाडा से लाई गईं माता अन्नपूर्णा की प्राचीन दुर्लभ मूर्ति को बाबा विश्वनाथ के विशेष सिंहासन (गौना- रजत पालकी) पर विराजमान करा विश्वनाथ धाम में प्रवेश कराया गया। यह रजत पालकी और रजत सिंहासन काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ कुलपति तिवारी ने उपलब्ध कराया।
खास बात यह रही कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद पूरे श्रद्धा के साथ देवी की रजत पालकी उठाई और मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा किया। यह देख काशी के शिवभक्त गदगद हो गये। मदनपुरा में मुस्लिम समाज की ओर से मूर्ति शोभायात्रा का स्वागत कर शहर के गंगा जमुनी तहजीब का खुशनुमा उदाहरण पेश किया गया।
काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ कुलपति तिवारी ने बताया कि माता अन्नपूर्णा माता गौरा की ही स्वरूप है। ऐसे में माता गौरा के अन्नपूर्णा स्वरूप का बाबा दरबार में आगमन परंपरागत रजत पालकी में ही हुआ। माता गौरा बाबा विश्वनाथ के साथ राजसी स्वरूप में वर्ष में एक बार रंगभरी एकादशी पर ही रजत पालकी में विराजती हैं।
बताया कि रंगभरी एकादशी पर आयोजित होने वाली “शिवाजंली” ओर से बनवाये गये 22 फुट ऊंचे भव्य द्वार माता की अगवानी की गई। शिवाजंली के सदस्यों ने माता पर पुष्पों की वर्षा की। डॉ कुलपति तिवारी ने प्रदेश के गणमान्य व्यक्तियों के साथ विश्वनाथ मंदिर में माता की अगवानी की।
डॉक्टर कुलपति तिवारी ने बताया कि कनाडा से लाई गई माता अन्नपूर्णा की मूर्ति को छत्ताद्वार पर उस विशेष सिंहासन पर विराजमान कराया गया । जो रंगभरी एकादशी के दिन परंपरागत आयोजन में प्रयोग की जाती है। उस पालकी में चांदी का सिंहासन भी रखा गया है। यह पालकी और चांदी का सिंहासन प्रतिवर्ष अमला एकादशी के दिन प्रयोग में लाई जाती है। इसी पालकी पर विराजमान होकर माता अन्नपूर्णा विश्वनाथ धाम में प्रवेश किया।
