वाराणसी (हि.स.)। कमच्छा स्थित बाबा बटुक भैरव का रविवार को भव्य त्रिगुणात्मक शृंगार किया गया। दरबार में अल सुबह से लेकर रात तक तीन स्वरूपों में बाबा की झांकी के दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। श्रद्धालु नर नारी बाबा का सात्विक, राजसी एवं तामसी स्वरूप देख आह्लादित होते रहे।
इसके पहले भोर में मंदिर के व्यवस्थापक जितेन्द्र मोहन पुरी ‘विजय गुरु’ ने बाबा के बाल स्वरूप के विग्रह को पंचामृत स्नान कराया। इसके बाद श्वेत पुष्पों से सात्विक शृंगार किया गया। तत्पश्चात पंचमेवा, फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया और मंगला आरती हुई। भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए। सायंकाल चार बजे गुलाब के पुष्पों सहित स्वर्ण और रजत आभूषणों से बाबा बटुक भैरव का राजसी रूप में शृंगार हुआ। बाबा को 56 भोग अर्पित किया गया। शाम को ही बटुक रुद्र महायज्ञ भी शुरू हुआ। रात्रि 8 से 9 बजे तक महाआरती के बाद बाबा का तामसी शृंगार एवं तामसी पूजन रात 10 बजे से होगा। रात में पंचमकार द्वारा वक्रासन पूजा होगी। बाबा के विग्रह को 1100 काला गंडा और 1100 रुद्राक्ष के दानों से सजाया जाएगा। पंच मकार के भोग के साथ ही बाबा का खप्पर शराब से भरा जाएगा। महाआरती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। अगले दिन 26 दिसंबर सोमवार को पूर्वाह्न 11 बजे से बटुक पूजा होगी। बताते चलें कि शरद ऋतु में बटुक भैरव का त्रिगुणात्मक शृंगार किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि बाबा के तीनों स्वरूप के दर्शन मात्र से दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों के साथ नव ग्रह दोष से भी मुक्ति मिलती है।
श्रीधर
