बलिया (हि.स.)। बहन की कैंसर से मौत ने किसान को झिंझोड़ कर रख दिया। इसके बाद उन्होंने इसकी वजह रासायनिक उर्वरक को मानते हुए देशी नस्ल की गाय आधारित प्राकृतिक खेती शुरू कर दी। अब उनकी जिजिविषा को मुकाम मिला है। प्राकृतिक खेती में मिसाल कायम करने वाले किसान रंगनाथ मिश्र को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुरस्कृत किया है।
बांसडीह तहसील के सोनवानी निवासी रंगनाथ मिश्र ने प्राकृतिक खेती के प्रति अपने रुझान के बारे में बताया कि मैं 2014 से प्राकृतिक खेती कर रहा हूं। जब मैंने इस कार्य को शुरू किया था तो मेरे आस पड़ोस के लोग या खेती करने वाले किसान बहुत ही हेय दृष्टि से देखा करते थे। कहते थे यह बेकार का काम है, लेकिन मैंने उसके बाद भी अपना कार्य जारी रखा। देसी गाय पर आधारित प्राकृतिक खेती नहीं छोड़ा। कहते हैं कि इसका परिणाम अब मुझे मिला है। जब मुझे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा प्रोत्साहन और मुझे सम्मान मिला। हालांकि, रंगनाथ मिश्र इसके पीछे की कहानी बताते हुए कहते हैं कि इस कार्य को शुरू करने के पहले मेरा मन बड़ा विचलित था। क्योंकि 2006 में मेरे घर पर एक घटना हुई। वह घटना मेरे हृदय में छा गई।
मेरी छोटी बहन की मृत्यु कैंसर के कारण हुई। मैं उसी समय से उसकी मृत्यु का कारण ढूंढने लगा। अंत में 2010 में जाकर के मेरा निष्कर्ष निकला कि जो भी अन्न हमें भोजन के रूप में लेना पड़ रहा है, वह पूर्ण रूप से दूषित है। रोग युक्त है। मैं उसी समय रासायनिक उर्वरक का प्रयोग बंद कर देशी गाय के गोबर और गोमूत्र प्रयोग करने लगा। इसका आज भारत सरकार और उत्तर प्रदेश की सरकार भी बढ़ावा दे रही है। इसीलिए मुझे आज सम्मानित किया गया।
रंगनाथ मिश्र ने सभी किसानों से अपील किया है कि कम से कम अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए देशी गोवंश आधारित पारंपरिक खेती थोड़े से ही प्रारंभ करें और स्वयं और अपने परिवार को सुरक्षित रखें।
पंकज
