बलिया (हि.स.)। छठे चरण में बलिया की सात सीटों के लिए चुनाव सम्पन्न हो चुका है। चुनाव में भाग्य आजमा रहे प्रत्याशी और उनके दल हार-जीत का गुणा-भाग करने में जुटे हैं।
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सात में से पांच सीटों पर कामयाबी हासिल हुई थी। तब भाजपा को फेफना, बलिया नगर, बैरिया, सिकन्दरपुर और बेल्थरारोड में जीत मिली थी। रसड़ा में बसपा और बांसडीह में सपा ने जीत हासिल की थी। इस बार के चुनाव में ओमप्रकाश राजभर के सपा से हाथ मिला लेने से सियासी समीकरण थोड़ा बदल गए हैं। हालांकि, माना जा रहा है कि मोदी और योगी सरकार की गरीब कल्याण योजनाओं ने असर दिखाया तो भाजपा अपने किले को बचाने में कामयाब हो जाएगी। गुरुवार को मतदान कर रहे ज्यादातर लोगों ने विकास और चुस्त कानून व्यवस्था के नाम पर वोट डालने की बात कही। राजनीतिक पंडित इसे भाजपा के पक्ष में मान रहे हैं।
कई तो यह कहने से गुरेज नहीं कर रहे कि कोरोना काल में सरकार द्वारा राशन का वितरण भी गुल खिला सकता है। वहीं कुछ का यह भी मानना है कि यादव, मुस्लिम और राजभर समेत कई अन्य पिछड़ी जातियों के वोटों की गणित कई सीटों पर भाजपा का खेल बिगाड़ भी सकते हैं। रसड़ा के अलावा कुछ सीटों पर बसपा के दमदारी से लड़ने से चौंकाने वाले नतीजे के लिए भी तैयार रहना चाहिए। इसके अलावा भाजपा के बागी भी खेल को पलट दें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इन सबके बीच सभी प्रत्याशी शुक्रवार को अपनी-अपनी जीत के दावे करते नजर आए। अपने-अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इसे जाहिर भी किया। दावे चाहे जो हों, असली तस्वीर तो दस मार्च को ही सामने आएगी।
पंकज
