Friday, April 3, 2026
Homeउत्तर प्रदेशबलिया : दो दशक से बंद रसड़ा कताई मिल के आ सकते...

बलिया : दो दशक से बंद रसड़ा कताई मिल के आ सकते हैं ‘अच्छे दिन’

– कताई मिल की जमीन व मौजूद संसाधनों के सदुपयोग की बन रही रणनीति

बलिया (हि. स.)। दो दशक से बंद पड़ी कताई मिल रसड़ा का शनिवार को जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही ने सीडीओ विपिन कुमार जैन संग निरीक्षण किया। इस दौरान कताई मिल की मशीनों व अन्य उपलब्ध संसाधनों के सदुपयोग की रणनीति पर चर्चा हुई।
बंद पड़ी कताई मिल को चालू कराने की मांग अक्सर उठती रहती है। मिल के चालू होने की स्थिति में हजारों लोगों को रोजगार मिलने की दलीलें दी जाती हैं। हालांकि, अब सरकार का इस पर ध्यान गया है। शायद यही वजह है कि जिले के आला अधिकारी कताई मिल में जर्जर पड़े संसाधनों को देखने पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने कताई मिल की जमीन व संसाधनों का कैसे सदुपयोग किया जाए, इस पर यूपी स्टेट यार्न कानपुर के अधिकारी के साथ चर्चा भी की। हालांकि, बीस वर्षों से पड़ी रहने के बावजूद मशीनों की स्थिति काफी हद तक सही मिली। 
  पूरे परिसर का भ्रमण करने के बाद मिल के अंदर दोनों अधिकारी गए और वहां पड़ी मशीनों के बारे में पूछताछ की। बताया गया कि मशीनें बीस वर्ष से ठप हैं, लेकिन बहुत थोड़ी सर्विसिंग हो जाए तो ये मशीनें अभी भी चल सकती हैं। यह भी बताया कि वर्तमान में मिल की देनदारी 71 करोड़ रूपए है। गोदाम की भी हालत अधिकारियों ने देखी। निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने वहां मौजूद सुरक्षा जवानों से पूछा कि यहां सुरक्षा सम्बन्धी कोई दिक्कत तो नहीं है। एसडीएम मोतीलाल यादव को निर्देश दिया कि समय-समय पर यहां आकर जरूरी जानकारी लेते रहें।
कभी पांच हजार लोग करते थे काम
कताई मिल के बारे में पूछताछ करने पर लेखाधिकारी जेपी दूबे ने बताया कि इस मिल का प्रोजेक्ट 32 करोड़ का था और यह मिल 1986 में चालू हुई थी। इसमें पांच हजार लोग काम करते थे। इसके 14 वर्षों बाद वर्ष 2000 में बंद हो गयी और उसके बाद जस की तस पड़ी है। यह भी बताया कि अंदर लगी मशीनें बीस साल होने के बाद भी काफी हद तक सही हैं, जो ग्रीसिंग व आयलिंग के बाद सही हो सकती हैं।
परिसर बना है जंगल, नीलगायों का है बसेरा
कताई मिल परिसर में डीएम व सीडीओ घुसे तो सामने जंगल सा दिखा। परिसर में तमाम पेड़ गिरे थे, जिसकी लकड़ियों के सदुपयोग के सम्बन्ध में वन विभाग से आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित कराने के संकेत दिए। परिसर में नीलगायों का झुंड देख जिलाधिकारी ने कताई मिल के लेखाधिकारी का कार्य देख रहे जेपी दूबे से पूछा कि बाउंड्री के अंदर नीलगाय आखिर कैसे आई। पूरे परिसर में भ्रमण किया तो पाया कि बाउंड्री एक जगह टूटी हुई थी। सुरक्षा के लिहाज से उसे शीघ्र बनवाने के निर्देश दिए।

RELATED ARTICLES

Most Popular