बलिया (हि. स.)। जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय ने दिल, दरिया और दुल्हन को स्वस्थ रखने की अनोखी पहल की है। विश्वविद्यालय ने किसानों के साथ मिलकर दलहन की उन्नत खेती के लिए पांच गांवों को गोद लिया है। इन गांवों के सौ अनुसूचित जाति के किसानों को बुधवार को उन्नत किस्म के मूंग और उड़द के बीज वितरित किए गए।
जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय कृषि के अध्ययन, शोध एवं विकास के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रुप में विकसित हो रहा है। इसी बात को ध्यान में रखकर विश्वविद्यालय ने अब तक तीन कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि अनुसंधान संस्थानों के साथ समझौता (एमओयू) किये गए हैं। उन्नत कृषि के लिए विश्वविद्यालय लगातार प्रयास कर रहा है। इसी दिशा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर और जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किसान गोष्ठी का आयोजन विश्वविद्यालय के सभागार में किया गया। इसमें विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए पांच गांवों के अनुसूचित जाति के 100 किसानों को 10 किलो प्रति किसान के हिसाब से मूंग और उड़द की उन्नत प्रजातियों के बीज वितरित किए गए।
उड़द के उन्नत बीज आईपीयू 13-1 का विकास डा.अवनीन्द्र कुमार सिंह द्वारा किया गया है, जो इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। उल्लेखनीय है कि डा. सिंह वर्तमान में आईआईपीआर के प्रधान वैज्ञानिक एवं लिविंग लीजेंड्स ऑफ बलिया फोरम के सदस्य हैं।
बता दें कि विश्वविद्यालय ने लिविंग लीजेंड्स ऑफ बलिया फोरम के गठन इस उद्देश्य से किया गया है कि अलग-अलग क्षेत्रों के शीर्षस्थ विभूतियों के अनुभवों का लाभ जिले को मिल सके।
डा. अवनीन्द्र सिंह ने इस अवसर पर ‘कृषि स्थिरीकरण के लिए दलहनी फसलों की खेती’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि दिल, दरिया और दुल्हन को स्वस्थ रखने के लिए दालों की खेती को बढ़ावा देना आवश्यक है। दालों की खेती से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। साथ ही दालें प्रोटीन देती हैं और प्राकृतिक रूप से कोलेस्ट्रॉल एवं शुगर को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। आपने उपस्थित किसानों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान सुझाया। उन्होंने कहा कि जल्द ही विश्वविद्यालय के सहयोग से मैं इस क्षेत्र में एक मिनी दाल मिल स्थापित करने का प्रयास करूंगा।
अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए प्रो कल्पलता पाण्डेय ने सहयोग के लिए डा.अवनीन्द्र सिंह का आभार प्रकट किया। स्वागत डा. यादवेंद्र प्रताप सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डा. अमित सिंह ने किया।
इस अवसर पर डा.आइपी सिंह, डा. ओपी सिंह, डा.दिलीप श्रीवास्तव, डा. अरविन्द नेत्र पाण्डेय, डा. खुशबू दुबे, डा.नेहा विशेन और प्रधान करीमुद्दीन अंसारी आदि उपस्थित थे। संचालन डा. लालविजय सिंह ने किया।
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