बलिया(हि.स.)। भाजपा ने 2017 में प्रचंड बहुमत के साथ देश में सबसे अधिक जनसंख्या वाले प्रदेश में सरकार बनाई। सरकार की कमान हिंदुत्व का प्रखर चेहरा योगी आदित्यनाथ के हाथों में सौंपी गई। लोगों को योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार से बड़ी उम्मीदें थीं। सरकार इन चार सालों में जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतर पायी, इसको लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता रामगोविन्द चौधरी से विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश….
प्रश्न: योगी सरकार के चार सालों में प्रदेश का कितना विकास हुआ ?
उत्तर: इस सरकार ने पिछले चार वर्षों में विकास का कोई भी ऐसा कार्य नहीं किया, जो उल्लेखनीय हो। यह सरकार असत्य बोलने और अपशब्द बोलने के अलावा कोई काम नहीं कर सकी है। सरकार चार सालों में सिर्फ असफल हुई है।
प्रश्न: सरकार के दावे हैं कि चार सालों में जितना विकास हुआ, उतना कभी नहीं हुआ ?
उत्तर: ये लोग हमारी सरकार के कार्यों को अपना बता रहे हैं। समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव की सरकार में किये गए विकास एवं लोक कल्याणकारी कार्यों का फीता काटना और उनके कार्यों का नाम बदलने में ही इनके चार वर्ष बीत गए।
प्रश्न: आपके विधानसभा क्षेत्र बांसडीह व जिले में विकास का कोई कार्य नहीं हुआ ?
उत्तर: बलिया के लिए तो ये चार साल बेहाल करने वाले रहे। इस सरकार के चार साल में जनपद को कुछ नहीं मिला। दुःखद यह है कि जो पिछली समाजवादी पार्टी के सरकार में मिला था उसे भी राजनीतिक द्वेषवश रोक दिया गया। जिसका जीता जागता उदाहरण है शिवरामपुर घाट पर बना जनेश्वर मिश्र पुल, जिसका सम्पर्क मार्ग तक इन चार वर्षों में नहीं पूर्ण हो पाया। घाघरा नदी के चांदपुर में बने पुल का भी वही हाल है। दरौली घाट का पुल व स्पोर्ट्स कालेज ये सभी योजनाएं अखिलेश यादव जी के मुख्यमंत्रित्व काल की हैं, जो अधर में लटकी है। इस सरकार ने हमारे विधानसभा में विकास के लिए कोई पैसा नहीं दिया।
प्रश्न: आपकी समझ से योगी सरकार ने शिक्षा पर कितना कार्य किया है ?
उत्तर: इनके एजेंडे में शिक्षा का विकास है ही नहीं। सपा सरकार के दौरान जिले को एक विश्वविद्यालय मिला था। ताकि पिछड़े जनपद में उच्च शिक्षा का विकास हो सके। जिसे जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है। इस विवि को इन चार वर्षों में एक धेला भी सरकार के तरफ से नहीं मिला और ना ही एक भी विषय की मान्यता में बढ़ोत्तरी हुई। उल्टे उसके स्थान परिवर्तन की बात शुरू हो गई। यह स्थान परिवर्तन नहीं है बल्कि सरकार इस विश्वविद्यालय के अस्तित्व को की खत्म करना चाहती है। लेकिन, भाजपा को यह भान नहीं है कि यह जनपद ऋषियों-मुनियों की तपोस्थली रही है। आज़ादी के वीर सपूतों की भूमि है। बड़े-बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के केंद्र में यह जनपद रहा है। इसके साथ नाइंसाफी करने वाली सत्ता फिर कभी वापस नहीं आई है।
प्रश्न: योगी सरकार 2022 में विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने का मन बना रही है। क्या कहेंगे इस पर ?
उत्तर: यही तो सवाल है कि सत्ताधारी दल के लोग अपने द्वारा किये गए किस कार्य को लेकर पुनः 2022 में जनता के बीच जाएंगे ? ये लोग इन चार वर्षों की कौन सी उपलब्धि बताएंगे ?
प्रश्न: सरकार का दावा है कि इन चार सालों में रोजगार के अनेक अवसर पैदा किए गए। आप क्या मानते हैं ?
उत्तर: सरकारी नौकरी करने वाले लोगों के कई भत्ते बन्द कर दिये गये। शिक्षकों व कर्मचारियों का महंगाई भत्ता जो हर छह माह में बढ़ता था, उसे फ्रीज कर दिया गया। जिससे कर्मचारी व शिक्षक वर्ग परेशान हैं। नई भर्तियों का नामोनिशान नहीं है। व्यापारी, युवा व किसान परेशान परेशान हैं। जबकि सरकार चार साल के जश्न मनाने में व्यस्त है। इससे बड़ी विडम्बना क्या हो सकती है।
