Wednesday, March 4, 2026
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बलात्कार पीड़िता की मौत के बाद खुलने लगे राज, फरार नहीं था लेखपाल करता था रोजाना ड्यूटी

– शराब पार्टी में गांव के युवक ने बहलाकर किशोरी को था परोसा, सामूहिक दुष्कर्म से हुई थी गर्भवती

कानपुर (हि.स.)। ककवन थाना क्षेत्र की एक बलात्कार पीड़िता ने मंगलवार को मृत बच्चे को जन्म देने के बाद दम तोड़ दिया था। जच्चा-बच्चा की मौत के बाद हरकत में आई पुलिस ने बुधवार को नामजद आरोपी लेखपाल को गिरफ्तार कर लिया और दो अन्य अज्ञात आरोपियों की तलाश में जुट गई। अब सवाल उठता है जिस आरोपी लेखपाल को पुलिस फरार बता रही थी तो वह रोजाना ड्यूटी कैसे करता था। परिजनों का आरोप है कि लेखपाल ड्यूटी के दौरान आए दिन गांव आकर धमकी देता था और पुलिस बराबर उसे फरार बता रही थी।

हैलट अस्तपाल के जच्चा बच्चा विभाग में मंगलवार को एक बलात्कार पीड़िता ने मृत बच्चे को जन्म दिया था। इसके बाद मां की भी मौत हो गई। पीड़िता के पिता ने बुधवार को बताया कि पत्नी की मौत हो चुकी है और परिवार में एक बेटा और 15 वर्षीय बेटी रहती थी। बेटे के साथ दिनभर मजदूरी करने के लिए वह अक्सर बाहर चले जाते थे और घर में उनकी बेटी अकेले रहती थी। उनका आरोप है कि बेटी को गांव का रहने वाला कंचन नाम का युवक करीब नौ माह पहले बहला फुसलाकर एक शराब पार्टी में ले गया। शराब पार्टी में लेखपाल रंजीत बरवार, करन व दो अन्य ने उनकी बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी दी थी। इसके साथ ही कहा जा रहा था गर्भपात करा देंगे, किसी को कुछ पता नहीं चलेगा। इस पर बेटी चुप रही और बीते अक्टूबर माह में जब उसने घटना को बयां किया तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। इस पर थाने मे कंचन, रंजीत और अन्य दो के खिलाफ तहरीर दी गई और मुकदमा भी दर्ज हुआ, लेकिन पुलिस हीलाहवाली करती रही और सिर्फ कंचन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वहीं, आरोपित लेखपाल आए दिन घर आकर मुकदमा वापसी का दबाव बनाता रहा। इस पर जब भी पुलिस से शिकायत की जाती थी तो कहा जाता था कि लेखपाल फरार है और उसकी तलाश की जा रही है।

आनन-फानन में लेखपाल गिरफ्तार

जच्चा बच्चा की मौत के बाद हरकत में पुलिस ने आनन-फानन में देर रात आरोपित लेखपाल को गिरफ्तार कर लिया और दो अन्य आरोपितों की तलाश तेज कर दी गई। अब सवाल उठता है कि जिस लेखपाल को पुलिस फरार बता रही थी उसे 24 घंटे के अंदर कैसे गिरफ्तार कर लिया। यह भी बात सामने आ रही है कि बिल्हौर तहसील में लेखपाल संघ का आरोपित लेखपाल अध्यक्ष भी है और वह कहीं भी फरार नहीं था। पुलिस की सांठगांठ से वह खुलेआम घूम रहा था और रोजाना ड्यूटी भी कर रहा था। हालांकि ड्यूटी की अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई पर दबी जुबान कई लेखपाल भी स्वीकार कर रहे हैं कि आरोपित लेखपाल रोजाना ड्यूटी कर रहा था।

दो अन्य आरोपितों को कोर्ट से मिल सकता है लाभ

बालात्कार पीड़िता की मौत हो चुकी है और उसने अपने बयान में बताया था कि गांव का करन और लेखपाल रंजीत दो अन्य लोगों के साथ घटना को अंजाम दिया था। दोनों के नाम नहीं जानती पर सामने आने पर पहचान जाऊंगी। ऐसे में अब सवाल उठता है कि जब पीड़िता ही इस दुनिया में नहीं है तो अन्य आरोपितों को अगर पुलिस जेल भी भेजती है तो उन्हें संदेह का लाभ मिल सकता है।

एससी एसटी हटाने पर सीओ की भूमिका संदिग्ध

बीते अक्टूबर माह में किशोरी के पिता ने पॉक्सो, बलात्कार और एससी एसटी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। पीड़िता और नामजद आरोपित एक ही वर्ग से होने के चलते सीओ बिल्हौर राजेश कुमार ने एससी एसटी की धारा को जांच में हटा दिया। अब सवाल यह उठता है कि जब दो अन्य की पहचान ही नहीं हुई तो एससी एसटी की धारा सीओ ने कैसे हटा दी। इसी को लेकर सीओ की भूमिका भी संदिग्ध दिखाई दे रही है।

अजय

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