रोहित गुप्ता
उतरौला /बलरामपुर
बुधवार को सीएचसी उतरौला सभागार मे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके)बैठक में
मे विद्यालयों के बच्चों के स्वास्थ परीक्षण के बारे में विस्तृत चर्चा की गयी। बच्चों को आयरन फोलिक एसिड टैबलेट की उपलब्धता, खुराक खिलाने का तरीका व इसके लाभ के बारे मे बताया गया। साथ ही किशोरिया को सैनेटरी पैड उपलब्ध कराने के लिए कहा गया। आगनबाड़ी केन्द्रो पर कुपोषित बच्चों के चिन्हीकरण एवं NRC पर भर्ती कराने पर चर्चा हुई।
अधीक्षक डॉ चंद्रप्रकाश सिंह ने कहा कि
वार्षिक तौर पर देश में जन्म लेने वाले 100 बच्चों में से 6-7 जन्म संबंधी विकार से ग्रस्त होते हैं। यानि सभी नवजातों में से 9.6 प्रतिशत की मृत्यु इसके कारण होती है। पोषण संबंधी विभिन्न कमियों की वजह से विद्यालय जाने से पूर्व अवस्था के अधिकतर बच्चे विभिन्न प्रकार के विकारों से ग्रस्त होते हैं। यदि इन पर समय रहते काबू नहीं पाया गया तो यह स्थायी विकलांगता का रूप धारण कर सकती है।
बच्चों में कुछ प्रकार के रोग समूह बेहद आम है जैसे दाँत, हृदय संबंधी अथवा श्वसन संबंधी रोग। यदि इनकी शुरूआती पहचान कर ली जायें तो उपचार संभव है। इन परेशानियों की शुरूआती जांच और उपचार से रोग को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। जिससे अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत नहीं आती और बच्चों के विद्यालय जाने में सुधार होता है।
खंड शिक्षा अधिकारी सतीश कुमार ने कहा कि समय रहते उपचार से मरीज की स्थिति और अधिक नहीं बिगड़ती और साथ ही गरीबों और हाशिए पर खड़े वर्ग को इलाज की जांच में अधिक व्यय नहीं करना पड़ता। बैठक को बाल विकास परियोजना अधिकारी ने भी संबोधित किया। डॉ अताउल्लाह खान, डॉ शालिनी मिश्रा, डॉ नसरुदीन, डॉ अमरेन्द्र, स्वेता भारती समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
बलरामपुर :राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम आरबीएसके बैठक हुआ
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