बलरामपुर(हि.स.)। शक्तिपीठ मंदिर देवीपाटन में गुरु गोरक्षनाथ के समय से गौ सेवा की अद्भुत परंपरा चली आ रही है। शक्तिपीठ पहुंच रहे श्रद्धालु मां पाटेश्वरी की पूजा-अर्चना के उपरांत गौशाला में पहुंच गौवंशों का पूजन करते हैं।
देवीपाटन मंदिर द्वारा संचालित गौशाला में विभिन्न प्रजातियों के दो सौ से अधिक गौवंश हैं, जिनमें कामधेनु गाय दर्शनीय है। इसका लोग पूजन करने पहुंचते हैं। गौवंशों की देखभाल के लिए एक दर्जन से अधिक कर्मी मंदिर के द्वारा नियुक्त हैं। इनके माध्यम से उनको चारा-पानी दिया जाता है और साफ-सफाई की जाती है। मंदिर के पीठाधीश्वर रोजाना दोनों समय सुबह-शाम पहुंच व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हैं।
पीठाधीश्वर के गौशाला पहुंचने पर खुले में घूम रहे गौवंश (बछड़ा व बछिया) पीठाधीश्वर को घेर लेते हैं। जो उन्हीं के पहुंचने के इंतजार में रहते हैं। महंत अपने हाथों से एक-एक गौंवश को मिष्ठान्न खिलाते हैं। गौरी, छुटकी आदि नाम से बुलाते हैं, जो आवाज सुनते ही रभांने लगती हैं, खुली हैं तो पहुंच जाती हैं। गौशाला पहुंच रहे लोग महंत के गौसेवा के भाव देख हतप्रभ रह जाते हैं।
शक्तिपीठ देवीपाटन जिसकी गणना 51 शक्तिपीठों में प्रधान पीठ के रूप में होती है। बताया जाता है कि पीठ की स्थापना महायोगी गुरु गोरखनाथ ने की थी। यहां पर उनके द्वारा जलाई गई धूनी आज भी युगों युगों से जल रही है। उनके समय से ही गौ सेवा यहां होती रही है। पीठाधीश्वर मिथिलेश नाथ योगी ने बताया कि देवीपाटन पीठ पर अनादिकाल काल से गौसेवा की परम्परा रही है। शिव अवतारी महायोगी गुरु गोरक्षनाथ का नाम ही गौ रक्षा से है। नाथ सम्प्रदाय धर्म के साथ ही गौरक्षा एवं विश्व कल्याण की कामना से सदैव कार्य करता है।
शक्तिपीठ पहुंच रहे श्रद्धालु गौशाला में पहुंच गोवंश की पूजा करते हैं। प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ भी देवीपाटन आगमन के दौरान इस गौशाला में पहुंच गौ सेवा करते हैं। देवीपाटन गौशाला, गौशाला संचालकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना है।
प्रभाकर
