Friday, March 27, 2026
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बरेली : फरियादियों की थाने और चौकिओं में नही हों रही सुनवाई

– जनपद में है 29 थाने, 68 चौकियां, साईबर थाना, विजिलेंस थाना

बरेली (हि स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का साफ निर्देश है कि सभी थानों में आये प्रत्येक पीड़ित की सुनवाई हो। उसकी बात को ध्यान से सुना जाए और उसकी समस्या का निस्तारण भी किया जाए। लेकिन जनपद में ऐसा नहीं हो रहा है यही वजह है कि बरेली के पुलिस ऑफिस में रोजाना सैकड़ों फरियादी एसएसपी के पास अपनी समस्या लेकर पहुंच रहे हैं, जिस वजह से फरियादियों की लम्बी लम्बी लाइन लग रही है।

पुलिस ऑफिस में रोजाना दूर-दराज से सैकड़ों की संख्या में फरियादी पहुंच रहे है, क्योंकि उनकी थानों में सुनवाई नही होती है। कोई 80 किलोमीटर दूर से तो कोई 60 किलोमीटर दूर से अपनी समस्या लेकर पुलिस अफसरों के पास पहुंच रहा है। सिरौली, बहेड़ी, रिछा, आंवला, फरीदपुर, नबाबगंज, शीशगढ़, शेरगढ़, मीरगंज, अलीगंज, क्योलाड़िया, सेथल ये सब वो जगह है जो जिला मुख्यालय से काफी दूर है। गरीब आदमी को यहां तक पहुंचने के लिए काफी किराया भी ख़र्च करना पड़ता है। कई-कई घण्टे भीषण गर्मी में लाइन में लगना पड़ता है तब जाकर एसएसपी के दरबार मे पीड़ित की पेशी होती है।

पीड़ित का हर तरह से शोषण होता है एक तो वो पहले से ही दुखी ऊपर से उसको कप्तान साहब तक पहुंचने में लम्बा सफर तय करना पड़ता है। एसएसपी ऑफिस पहुंचने वाले फरियादियों का कहना है कि थाने और पुलिस चौकियों में उनकी सुनवाई नही होती, उन्हें वहां से दुत्कार कर भगा दिया जाता है।

इस मामले में एसएसपी रोहित सिंह सजवाण का अलग ही तर्क है उनका कहना है कि जनसंख्या ज्यादा हो गई है। थानों के हिसाब से जनसंख्या ज्यादा है जिसकी वजह से लोग पुलिस अधिकारियों के पास आ रहे है। भले ही एसएसपी साहब अपनी पुलिस की कमिया न बताना चाह रहे हो लेकिन सच तो यही है कि आज भी थाने चौकिओं में गरीब की कोई सुनवाई नहीं हैं। एसएसपी का कहना है कि उनके पास सबसे ज्यादा साइबर फ्रॉड और घरेलू हिंसा के मामले आते है।

एसएसपी के अलावा एडीजी, आईजी, डीएम और कमिश्नर के यहां भी बड़ी संख्या में फरियादी आते हैं। सरकार की मंशा है कि लोगों की समस्या का जल्द निस्तारण हो इसलिए तहसील दिवस, समाधान दिवस, थाना दिवस भी लगाए जाते है लेकिन इनमें भी ज्यादातर लोगों की समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पाता है। लोगों को मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत करनी पड़ती है और कई बार लखनऊ तक मुख्यमंत्री से शिकायत करने जाना पड़ता है। फिलहाल अगर थानों और चौकिओं में सुनवाई हो जाये तो फरियादियों को दर-दर न भटकना पड़े।

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