Friday, February 13, 2026
Homeउत्तर प्रदेशबदली 24वें तीर्थंकर महावीर जैन की निर्वाणस्थली पावानगर की सूरत

बदली 24वें तीर्थंकर महावीर जैन की निर्वाणस्थली पावानगर की सूरत

-ग्राम पंचायत से नगर पंचायत में तब्दीली रंग लाई

कुशीनगर(हि. स.)। बौद्ध- जैन तीर्थस्थली पावानगर (फाजिलनगर) की सूरत अब बदली बदली नजर आ रही है। चमचमाती सड़के, खूबसूरत पाथ-वे, रौशनी बिखेरती एंटीक लाइटें, हरियाली लिए कतारबद्ध पौधे, व्यवस्थित धरोहर नगर के बदलती सूरत की कहानी साफ-साफ बयां कर रहे हैं। यूं कह लीजिए नगर पर्यटकों को तीर्थ की दिव्यता के साथ-साथ आगमन पर सुखद अनुभूति भी करा रहा है।

दो वर्ष पूर्व सरकार ने फाजिलनगर को ग्राम पंचायत से नगर पंचायत में तब्दील किया था। वजह साफ थी स्थल को देशी- विदेशी पर्यटन के अनुरूप विकसित किया जाए। 23 दिसम्बर 2019 को गठित नवीन नगर पंचायत, तहसील प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के समन्वित प्रयासों से सरकार की मंशा के अनुरूप कार्य दिखने शुरू हो गए हैं। आधारभूत संसाधनों की स्थापना के साथ साथ वार्डों व गांवों का भी कायाकल्प हो रहा है। प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्र का जीर्णोद्धार, बघौचघाट मोड़ पर जैन मंदिर प्रवेश द्वार का शिलान्यास, गांव के बच्चों को मोबाइल पुस्तकालय, हाई मास्ट लैम्प, विक्टोरियन लाइट, स्ट्रीट लाइट, सीसी सड़क व नाला व इंटरलॉकिंग सड़कों का निर्माण आदि के कार्यों से दिन हो या रात नगर की खूबसूरती देखते बन पड़ रही है। विकास कार्यो पर 4.5 करोड़ की धनराशि खर्च की जा चुकी है। जबकि एक करोड़ के कार्य प्रस्तावित हैं।

बनी है वोटिंग की योजना

नगर पंचायत ने देशी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वोटिंग की योजना बनाई है। चार वोट भी खरीद ली गई है। अधिशासी अधिकारी प्रेमशंकर गुप्त ने बताया कि छठियांव पोखरे का जीर्णोद्धार कर वहां वोटिंग की व्यवस्था बनाई जा रही है। जल्द ही वहां के लोग वोटिंग का लुत्फ उठा सकेंगे।

क्यों प्रसिद्ध है जैन तीर्थस्थली

बौद्धकालीन अवशेषों को समेटे हुआ पावानगर दुनिया को अहिंसा का संदेश देने वाले जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी की निर्वाण स्थली भी है। क्षेत्र में स्थित वीरभारी का टीला, बदुरांव में भोगनगर, फरेंदहा में चंद्रस्थल, बकुलहर में घोड़धाप और नदवा गांव में नंदग्राम का टीला है। इन टीलों से यहां की पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व का पता चलता हैं।

क्षेत्र के इतिहासकार डॉक्टर श्यामसुंदर सिंह ने इन टीलों से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर इनका महत्व लोगों के सामने प्रस्तुत किया। वीरभारी का टीला छठी सदी ईसा पूर्व में मल्ल राजाओं की राजधानी रही। इसका शोध पत्र 1995 में प्रोफेसर दयानंद त्रिपाठी के जरिए गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में पढ़ा जा चुका है। इनके अलावा रूस, चीन, अमेरिका जैसे देशों के विद्वान भी इससे परिचित हैं। हाल में हुई वीरभारी टीले की आंशिक खुदाई में तीन ईंटों पर मिलीं आकृतियां मल्ल राजाओं के समय की ओर संकेत देती हैं।

डॉक्टर श्यामसुंदर सिंह के मुताबिक 1996 में प्राचीन कई ऐसे टीले हैं, जिन्हें इतिहासकार भी प्रमाणित कर चुके हैं। उन्होंने इन स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किये जाने की जरूरत बताई। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व प्रशासक पूर्ण बोरा ने बताया कि ”पावानगर बौद्ध-जैन परम्परा में विशेष महत्व का स्थान है। नगर पंचायत के सृजन के बाद नागरिक सुविधाओं के साथ साथ पर्यटन विकास की दृष्टि से आधारभूत संसाधनों की स्थापना की जा रही है। नगर सुंदर दिखेगा तो पर्यटन विकास होगा और रोजगार के नए अवसर भी पनपेंगे”।

RELATED ARTICLES

Most Popular