Monday, February 16, 2026
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बंगीय पूजा पंडालों में सुहागिन महिलाओं ने सिंदूर खेला की रस्म निभाई, मां दुर्गा की विदाई

पूजा पंडालों से दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन, दिखा बेटी के विदाई सरीखा माहौल

वाराणसी (हि.स.)। शारदीय नवरात्र के समापन और विजय दशमी पर्व पर शुक्रवार को नगर के पूजा पंडालों में स्थापित मां दुर्गा की विधिवत आराधना के बाद उन्हें विदाई देकर प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।

इसके पहले बंगीय पूजा पंडालों में सुहागिन महिलाओं ने सिंदूर खेला की रस्म का निर्वहन किया। महिलाओं ने पंडालों में दुर्गा मूर्तियों के समक्ष एक दूसरे के माथे और गालों पर सिंदूर लगाकर उल्लासपूर्ण माहौल में मां दुर्गा को अगले वर्ष जल्दी आने की कामना के साथ विदायी दी। माता की विदाई के समय महिलाएं भावुक भी नजर आई। पंडालों से माता रानी की प्रतिमाओं को विर्सजन के लिए रवाना करने के समय वहां बेटी के विदाई सरीखी नजारा रहा। नगर के

राजा चेतसिंह किला परिसर स्थित काशी दुर्गोत्सव समिति के पूजा पंडाल में भी बंगीय महिलाओं के साथ क्षेत्रीय महिलाओं ने भी सिंदूर खेला की रस्म में भाग लिया। उधर, दोपहर से ही दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन यात्रा निकलने लगी। जिला प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के बीच निर्धारित कुंडों तालाबों में प्रतिमाओं को विसर्जित किया जा रहा है।

जिला प्रशासन के निर्देश पर नगर निगम की ओर से खिड़किया घाट और रामनगर के पास गंगा किनारे दो अस्थायी मूर्ति विसर्जन कुंड बनाए गए हैं। वहीं, निगम के पांच जोन दशाश्वमेध, भेलूपुर, आदमपुर, कोतवाली और वरुणापार जोन में कुल नौ कुंडों और तालाबों में दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन हो रहा है।

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