– मीरजापुर में प्रतिवर्ष साढ़े सात हजार टन होता है मछली उत्पादन
– पश्चिम बंगाल समेत अन्य प्रांतों में भेजी जाती है मछली
मीरजापुर (हि.स.)। मछली पालन के क्षेत्र में रोजगार करने के इच्छुक लोगों के लिए अच्छा अवसर है। मीरजापुर सहित विंध्याचल मंडल के भदोही व सोनभद्र में फिश सीड रियरिंग यूनिट (मछली बीज उत्पादन केंद्र) स्थापित किया जाएगा। प्रत्येक यूनिट की स्थापना पर प्रति हेक्टेयर लगभग सात लाख रुपये खर्च आएगा, इसमें से सरकार लगभग तीन लाख का अनुदान भी दे रही है।
रियरिंग यूनिट की स्थापना के लिए मत्स्य पालकों को अवसर मिल रहा है, इससे युवा स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बन सकेंगे। वित्तीय वर्ष 2022-23 में पांच हेक्टेयर में यूनिट की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। इसके सापेक्ष जनपद में अब तक 3.50 हेक्टेयर में यूनिट की स्थापना के लिए पहली किस्त जारी की जा चुकी है। मत्स्य पालन से युवाओं के स्वावलंबी बनने के साथ ही क्षेत्र में जल स्तर बढ़ेगा।
जनपद में करीब एक हजार तालाबों में मछली पालन हो रहा है। इस रोजगार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर लगभग पांच हजार लोग जुड़े हैं। मत्स्य निरीक्षक अभिषेक कुमार ने शनिवार को बताया कि मत्स्य पालन विभाग ने अब स्थानीय स्तर पर ही मछली पालन के कारोबार को बढ़ावा देने का प्रयास शुरू किया है। इसके लिए मत्स्य पालकों को आम किसानों की तरह किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराया गया, साथ ही प्रदेश के सभी जनपदों में फिश सीड रियरिंग यूनिट (मछली बीज उत्पादन केंद्र) विकसित करने के लिए बजट आवंटित किया गया है। प्रत्येक यूनिट लगभग एक हेक्टेयर की होगी। वर्तमान में मीरजापुर में ही प्रति वर्ष लगभग साढ़े सात हजार टन मछली का उत्पादन होता है। इसमें से लगभग साढ़े चार हजार टन मछली की खपत जनपद में होती है, शेष गैर जनपद, पश्चिम बंगाल आदि प्रांतों में भेज दिया जाता है।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य विवेक तिवारी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में पांच हेक्टेयर में यूनिट की स्थापना का लक्ष्य है। इसके सापेक्ष जनपद में अब तक 3.50 हेक्टेयर में यूनिट की स्थापना के लिए पहली किस्त जारी की जा चुकी है।
गिरजा शंकर
