Monday, April 13, 2026
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फसलों पर कीटनाशक का अधिक छिड़काव न करें किसान

सीतापुर (हि.स.)। फसलों पर रासायनिक कीटनाशकों के अंधाधुंध एवं अनुचित उपयोग के कारण मनुष्यों में कैंसर जैसी तमाम बीमारियां हो रही हैं। किसानों द्वारा रासायनिक कीटनाशी के अत्यधिक एवं गलत उपयोग के कारण फसल उत्पादन की लागत जहां बढ़ रही है वहीं विभिन्न कृषि उत्पादों में रासायनिक कीटनाशकों के अवशेष की वजह से निर्यात प्रभावित हो रहा है। यह बातें रीजनल सेंट्रल आई.पी.एम सेंटर के प्रभारी अधिकारी डॉ. ज्ञान प्रकाश सिंह ने कही।

भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन क्षेत्रीय केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र लखनऊ द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र, अम्बरपुर, सीतापुर परिसर में दो दिवसीय आईपीएमएचआरडी कार्यक्रम में डा. ज्ञान प्रकाश सिंह ने बताया कि एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (आईपीएम) अपनाने से रासायनिक कीटनाशी पर लगने वाला लागत कम होने के साथ-साथ बगैर कीटनाशी के कृषि उत्पाद पैदा होगा। इसके अलावा फसलों के विपणन एवं निर्यात से अच्छा मूल्य मिलेगा जो कि किसानों की आय दोगुनी करने हेतु एक महत्वपूर्ण एवं प्रभावी उपाय है।

उन्होंने आई.पी.एम के अंतर्गत जैविक फंफूदनाशी जैसे ट्राईकोडर्मा से बीज एवं मृदा उपचार तथा ब्यूवेरिया बैसियाना से मृदा उपचार, मेटाराइजियम एनिसोपली का छिड़काव, पीला एवं नीला चिपचिपा प्रपंच, फेरोमोन ट्रैप, प्रकाश प्रपंच, नीम सीड कर्नल एक्सट्रैक्ट इत्यादि का प्रयोग रासायनिक कीटनाशी के विकल्प के तौर पर प्रयोग करने के लिए कृषकों को प्रेरित किया।

वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केन्द्र, सीतापुर डॉ. सुरेश सिंह ने कहा कि रासायनिक कीटनाशकों के अंधाधुंध एवं असुरक्षित उपयोग से मानव शरीर एवं पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ता है। डॉ. उमेश कुमार सिंह ने कृषकों को पादप सुरक्षा के नए विकल्पों से अवगत कराया। सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी धर्म राज सिंह ने आईपीएम से सम्बंधित सभी विषयों के बारे में कृषकों को जानकारी दी। संचालन सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी अमित सिंह ने किया। कार्यक्रम में क्षेत्रीय केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र के के.पी. पाठक, धर्मेन्द्र कुमार सिंह, डॉ राहुल सुतार एवं डॉ सुधीन्द्र आदि उपस्थित रहे।

बृजनन्दन

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