Thursday, February 26, 2026
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फर्रुखाबाद : शीतगृहों में भंडारित आलू की निकासी न होने से किसान व शीतगृह मालिक परेशान

फर्रुखाबाद(हि.स.)। शीत गृहों में भंडारित आलू की निकासी न के बराबर होने से शीतगृह मालिक और आलू किसान दोनों परेशान हैं। हालात यह है कि अब तक केवल 10 फीसदी आलू की निकासी हो सकी है। जबकि गत वर्ष अब तक इसी अवधि में 25 फीसदी निकासी हो गई थी। 
बताते चलें किए बीते वर्ष आलू के भाव अच्छे मिलने की बजह से अधिकांश किसानों ने इस वर्ष अपना आलू शीतगृहों में भंडारित कर दिया। इस बार आलू की मांग बाहर की मंडियों में न होने से भंडारित आलू की निकासी नहीं हो पा रही है। जिसको लेकर आलू बेल्ट फर्रुखाबाद जनपद का किसान परेशान है। 
प्रगतिशील किसान नारद सिंह कश्यप जिले में सर्वाधिक आलू पैदा करते हैं। उनका कहना है कि आलू की निकासी ना होना किसानों के लिए चिंता का विषय है। यदि आलू की निकासी सही तरीके से नहीं होती तो फिर आलू कहां जाएगा। उनका कहना है कि बाहर की मंडियों में वैसे भी आलू की माग कम है। अब तक जो निकासी हुई है वह स्थानीय स्तर पर ही आलू की खपत हुई है। बाहर की मंडियों में न के बराबर मांग है। जिससे आने वाले समय में किसानों को भारी घाटा उठाना पड़ सकता है। निकासी न होने से जो संकेत मिल रहे हैं वह किसानों के लिए शुभ नहीं है। गत वर्ष इस अवधि तक 25 फीसदी भंडारित आलू की निकासी हो गई थी। जिससे किसानों को घाटा नहीं उठाना पड़ा था। इस वर्ष किसानों को आलू में भारी घाटा हो सकता है। 
आलू आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष रिंकू वर्मा का कहना है की मंडी में भी आलू की आमद ना के बराबर है। कोई भी व्यापारी बाहर से इस समय आलू की खरीद के लिए नहीं आ रहा है। जिससे आलू के भाव और नीचे जाने की संभावना है। उनका कहना है कि मौजूदा समय में 400 से 450 रुपये प्रति पैकेट आलू बिक रहा है। एक पैकेट में तकरीबन 50 किलो आलू होता है। आलू किसानों को जो भाव मिल रहा है उससे भारी घाटा हो रहा है। 
शीतगृह एसोसिएशन के सचिव उमेश गुप्ता का कहना है कि आलू की निकासी इस समय न के बराबर है। आलू की निकासी लगातार जारी रहती है तो आलू के भाव अच्छे मिलने की उम्मीद होती है। निकासी कम होने पर किसान शीतगृह का भंडारण शुल्क अदा नहीं कर पाता है। नतीजतन वह शीतगृहों में ही आलू छोड़ देता है। जिसका खामियाजा शीतगृह मालिकों को उठाना पड़ता है। उनको अपने पैसे से किसानों द्वारा शीतगृहों में छोड़ा गया आलू फिक बाना पड़ता है। 
उनका मानना है कि मौजूदा समय में जिले के 80 शीतगृहों में 5.30 लाख मैट्रिक टन आलू भंडारित है। इतनी बड़ी मात्रा में आलू की निकासी एक साथ होना सम्भव नहीं है। उन्होंने कहा कि लिवाली कम होने से निकासी न के बराबर रह गई है ।जो कि शीतगृह मालिक और किसान दोनों के लिए चिंता का विषय है। 

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