Thursday, February 12, 2026
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फर्रुखाबाद : मंडियों में मांग घटने से औधे मुंह गिरे आलू के भाव, किसान परेशान

– शीत गृह मालिकों पर भी संकट के बादल

चन्द्रपाल सिंह सेंगर 

फर्रुखाबाद (हि.स.)। आलू आधारित बेल्ट फर्रुखाबाद के किसानों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। आलू की मांग बाहरी मंडियों में ना होने से आलू की कीमत तीन सौ रुपया प्रति पैकेट किसानों को मिल रही है। जिससे आलू किसानों को लागत के दामों में भी घाटा हो रहा है। किसानों और शीत गृह मालिकों का मानना है कि यदि हालात यही रहे तो 25 फीसदी आलू शीत गृह मालिकों को अपने पैसे से फिकवाना पड़ेगा। 
बताते चलें कि, फर्रुखाबाद जिले में सर्वाधिक आलू पैदा किया जाता है। वैसे इटावा, औरैया, कन्नौज, मैनपुरी, कानपुर देहात, और एटा अलीगंज ,आगरा में भी बहुतायत से आलू पैदा किया जाता है। इस आलू आधारित बेल्ट के किसानों के बच्चों की पढ़ाई, लिखाई, शादी, विवाह का खर्चा आलू की फसल से ही चलता है। कहने को तो यह आलू जमीन में पैदा होता है लेकिन इस आलू से किसान आसमान के सपने देखता है। उनके सपने को इस बार बाहरी मंडियों में मांग ना होने से आलू के भाव फिर गिर गए हैं। जिससे आलू किसानों के माथे पर चिंता की रेखाएं उभर आई हैं।
बानगी के तौर पर फर्रुखाबाद जिले को ही ले लिया जाए तो यहां इस वर्ष 40 हजार हेक्टेयर भूमि पर आलू की खेती की गई थी। जिसमें 12 लाख कुंतल आलू की पैदावार हुई। 06 लाख मैट्रिक टन आलू को किसानों ने मंडियों में बेच दिया और शेष 06 लाख मैटिक आलू जिले के 80 शीतगृहों में भंडारी कर दिया। आलू की मांग बाहर की मंडियों में ना होने से अभी तक शीतगृहों से आलू की निकासी न के बराबर हो पाई है। 
इस संबंध में प्रगतिशील किसान नारद सिंह कश्यप का कहना है कि मौजूदा समय में आलू के भाव किसानों को 300 पैकेट मिल रहे हैं। एक पैकेट आलू 450 रुपये में बिक रहा है। 150 रुपया शीत गृह मालिक प्रति पैकेट भंडारण शुल्क काट रहे है। इस तरह किसानों को 300 रुपये पैकेट के दाम मिल रहे हैं। कच्ची फसल में किसानों का आलू 500 से 600 रुपया तक बिका। इन हालातों में किसानों को भारी घाटा पड़ रहा है। आलू की मांग ना होने से आलू किसान परेशान है। उनका मानना है कि हालात यदि यही रहे तो किसानों को शीत गृह में ही आलू छोड़ना पड़ेगा। जिसका घाटा किसानों के साथ-साथ शीत गृह मालिकों को भी उठाना पड़ेगा। 
इस संबंध में लक्ष्मी शीत गृह के मालिक उमेश अग्रवाल का कहना है अभी तक जिले के 80 शीतगृहों में 06 लाख मेट्रिक टन आलू भरा हुआ है। जिसकी निकासी ना होने से शीत गृह मालिक खुद परेशान है। उनका मानना है कि यदि हालात यही रहे तो शीतगृह मालिकों को अपने खर्चे से 25 फीसदी आलू फिकवा ना पड़ेगा। आलू किसान के साथ साथ शीत गृह मालिक भी इस साल भारी घाटे में चले गए हैं। 
आलू विकास निरीक्षक रामनाथ राजपूत का कहना है कि किसानों को चाहिए कि वह अभी अपना आलू बेच ले। जिससे उन्हें भारी घाटे का सामना ना करना पड़े। फिलहाल किसान आलू पर छाई मंदी की वजह से परेशान है और उनके आवश्यक कार्य रुके हुए हैं। 

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