फर्रुखाबाद (हि.स.)। खतरे के निशान पर पहुंचे गंगा के पानी से अमृतपुर तहसील क्षेत्र में हाहाकार मच गया है। बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे दर्जनों गांवों के बाशिंदों के सामने खाने पीने का संकट खड़ा हो गया है। फसलें जलमग्न होने से पशुओं के चारे की समस्या उत्तपन्न हो गई है। बाढ़ के पानी से घिरे लोग सांप और मगरमच्छ के साथ रात बिता रहे हैं। हालात यह है कि स्कूल, कालेज पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं और जन-जीवन प्रभावित हैँ
बताते चलें कि, गंगा नदी का जल स्तर बुधवार को 137.10 मीटर पर टक्कर मारने लगा है। खतरे के निशान पर पहुंची गंगा का पानी गांव लायकपुर, सबलपुर,जोगराजपुर, कुबेरपुर, कंचनपुर, मंझा की मड़ैया, कुतलुपुर समेत दर्जनों गांवों में घुस गया है। तहसील अमृतपुर के पास गंगा का पानी पहुंचने से स्थिति भयावह हो गई है।
गांव कुवेर पुर के मुन्ना सिंह बताते है कि बाढ़ का पानी इस समय खेतो में अथाह वह रहा है। जिससे धान, उर्द, मूंग मक्का की खड़ी फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गई है। खेतों में खड़ा चारा पूरी तरह बाढ़ के पानी मे डूब गया है जिससे पशुओं के चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है।
राजीव कुमार का कहना है कि बाढ़ से घिरे दर्जनों गांवों के बाशिंदे जहरीले सांप, बिच्छुओं तथा मगरमच्छों के साथ सो रहे है। अंधेरी रात में कब किसके घर में सांप घुस जाएं, कब मगरमच्छ पानी के साथ गांव में आ जाये, यह चिंता यहां के लोगों को सता रही हैं। हालात यह है कि इस क्षेत्र में पानी ही पानी नजर आ रहा है। लोगों का कहना है कि तेज आवाज के साथ गंगा का पानी घरों में घुस रहा है। जिससे लोगों के दिन का चैन और रात की नींद उड़ गई है।
लोगों का कहना है कि बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे हजारों लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के कोई प्रयास नही किये गए हैं। जिससे बाढ़ प्रभावित गांव के लोग छतों पर सोने को मजबूर है। एक दो दिन में बाढ़ पीड़ितों के सामने खाने-पीने की विषम समस्या उत्पन्न हो जाएगी। अभी तक उन लोगों को जिला प्रशासन की ओर से कोई इमदाद नहीं मिली हैं।
इस सम्बंध में तहसीलदार संतोष कुशवाहा से जब बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि वह बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का आज नाव से दौरा करेंगे। पीड़ितों को वाजिब सहायता पहुंचाई जाएगी।
