डीआइजी उपेन्द्र अग्रवाल ने एसपी गोंडा को कार्रवाई के लिए दिया निर्देश
जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में भू-सम्पत्तियों के फर्जी बैनामे व वसीयत के बढ़ते मामलों को देखते हुए एसपी गोंडा को जिले स्तर पर एण्टी फ्राड सेल गठित करने का निर्देश दिया गया है। यह सेल प्राप्त शिकायतों की तत्परता से जांच कर यह सुनिश्चित करेगा कि प्रकरण में वास्तव में फ्राड किया गया है अथवा नहीं। इसके साथ ही गोंडा सदर के उपनिबंधक कार्यालय में अब तक संज्ञान में आए फ्राड के 47 मामलों में से 33 में सुसंगत धाराओं में अभियोग दर्ज कराया जा चुका है, जिनमें से 25 की विवेचना शासन से गठित विशेष जांच टीम (एसआइटी) कर रही है। आठ अन्य मुकदमों की जांच भी एसआइटी से कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। यह जानकारी देते हुए देवीपाटन परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक उपेन्द्र कुमार अग्रवाल ने आज यहां बताया कि गोंडा जिले में भू-सम्पत्तियों के फर्जी बैनामे व वसीयत के बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस अधीक्षक को जिले स्तर पर एण्टी फ्राड सेल गठित करने का निर्देश दिया गया है। इस सेल में उपलब्धता के आधार पर सुयोग्य एवं विवेचना में दक्ष निरीक्षकों एवं उपनिरीक्षकों को नियुक्त किया जाएगा। यह सेल उच्चाधिकारियों को प्राप्त भू-सम्पत्तियों के फ्राड से सम्बंधित समस्त ऐसे समस्त प्रकरणों की गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक जांच करते हुए तय करेगा कि प्रकरण में कोई कूट रचना हुई है अथवा नहीं। इस सेल द्वारा यह जांच समयबद्ध तरीके से निस्तारित की जायेगी और जांच आख्या पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का निर्णय पुलिस अधीक्षक या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा लिया जायेगा। डीआइजी ने स्पष्ट किया कि एण्टी फ्रॉड सेल में केवल कूट रचित बैनामा एवं फर्जी वसीयतनामा से सम्बन्धित प्रकरणों को देखा जायेगा, जबकि पैतृक अथवा पट्टे की जमीन पर कब्जेदारी, पैसे के लेन-देन के विवाद, व्यावसायिक विवाद आदि प्रकरण थाना स्तर पर पूर्व की भांति निस्तारित किए जाएंगे।
भू-माफियाओं के खिलाफ दर्ज हो चुके हैं 33 मुकदमे
डीआइजी ने बताया कि सदर तहसील के निबंधन कार्यालय में विभागीय आंतरिक जांच में अब तक बैनामा बदलने एवं अभिलेखों से छेड़छाड़ के 47 प्रकरण संज्ञान में आए हैं, जिनमें 33 मामलों में सुसंगत धाराओं में अभियोग दर्ज कराया जा चुका है। उनके अनुरोध पर शासन द्वारा आइपीएस अधिकारी देवरंजन वर्मा की अध्यक्षता में गठित एसआइटी द्वारा 25 मुकदमों की विवेचना शुरू कर दी गई है। शेष आठ मुकदमों की विवेचना भी एसआईटी को स्थानांतरित किए जाने हेतु उनके द्वारा प्रस्ताव तैयार कर शासन को प्रेषित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 14 ऐसे मामलों में भी पीड़ित पक्ष को तलाश कर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराए जाने की कार्रवाई प्रचलित है, जिनमें अब तक अभियोग दर्ज नहीं किया जा सका है।
पुलिस कर्मियों तक को फर्जी मुकदमों में फंसाने की हो रही साजिश
डीआइजी ने कहा कि भू-सम्पत्तियों के घोटाले से जुड़ा यह गैंग इन प्रकरणों की जांच में लगे पुलिस कर्मचारियों तथा पीड़ित पक्षों को फर्जी रूप से फंसाने की साजिश भी रच रहा है। पिछले दिनों उन्हें एक ऑडियो क्लिप प्राप्त हुई है, जिसमें दो व्यक्तियों के बीच हो रही बातचीत से प्रथम दृष्टया स्पष्ट हो रहा है कि फर्जी बैनामे एवं जमीन हड़पने में लगे कतिपय अभियुक्तों द्वारा पुलिस कर्मियों को फर्जी रूप से फँसाने आदि का प्रयास किया जा सकता है। यहां तक कि महिला अपराध से संबंधित झूठा आवेदन सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत कर उनके विरुद्ध गंभीर धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआइआर) दर्ज करवाने का प्रयास भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस ऑडियो क्लिप में कई ऐसे पीड़ितों के नाम लिये गये हैं, जिन्हें इस गिरोह द्वारा पूर्व में फर्जी मामले में फंसाने की धमकी देकर अवैध वसूली भी की गयी है। डीआइजी ने कहा कि उन्होंने इस प्रकरण की गंभीरता से विस्तृत जांच के आदेश दिये हैं। जांच में सत्यता पाये जाने पर इसमें भी दोषी लोगों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में अभियोग दर्ज कराया जाएगा।
डीआइजी ने किया आगाह, यदि ऐसी सूचना मिले तो तुरंत बताएं
बता दें कि यह घोटाला उजागर होने के बाद उप निबन्धक (सदर) रहीं सुश्री सुधा यादव व उनके कार्यालय के कुछ अन्य कर्मचारियों के विरुद्ध मुकदमा लिखाने के लिए स्थानीय न्यायालय में दंप्रसं की धारा 156 (3) के अन्तर्गत झूठा आवेदन दिया गया था, जिसे अदालत द्वारा खारिज किया जा चुका है। डीआइजी ने सभी पीड़ितों व पुलिस कर्मियों से अपील किया है कि उनके विरुद्ध किसी भी अदालत में यदि मुकदमा दर्ज कराने के लिए साजिशन कोई फर्जी आवेदन किया जाता है, तो प्रकरण संज्ञान में आते ही तत्काल उच्चाधिकारियों समेत उन्हें भी सूचित करें। उन्होंने ऐसे मामलों की जांच अथवा विवेचना में लगे पुलिस कर्मियों को इस सम्बंध में सर्तक रहने को कहा है। साथ ही पीड़ित पक्ष एवं अन्य विभागीय कर्मचारियों को भी सतर्क रहने के साथ उन्हें जरूरत पर सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश भी एसपी को दिया है। उल्लेखनीय है कि उप निबंधक सदर कार्यालय में अभिलेखों से छेड़छाड़ करने के मामले में लचर पर्यवेक्षण के लिए दोषी ठहराते हुए शासन ने अब तक आधा दर्जन अधिकारियों और कर्मचारियों को निलम्बित कर दिया है। इनमें उप निबंधक सदर पद पर तैनात सुश्री सुधा यादव भी शामिल हैं, जिन्होंने इस प्रकरण में वादी मुकदमा बनकर पहली प्राथमिकी स्वयं थाना कोतवाली नगर में दर्ज कराई थी और उन्होंने ही अभिलेखों की जांच के उपरान्त 47 संदिग्ध मामलों का खुलासा किया था।
डीआइजी से कभी भी मिल सकते हैं माफियाओं से पीड़ित
डीआइजी उपेन्द्र अग्रवाल ने जनपद वासियों से अपील किया है कि यदि किसी भी व्यक्ति के साथ फर्जी बैनामा अथवा वसीयत के आधार पर फ्राड किया गया हो, तो वह उन्हें अपनी शिकायत दे सकता है। उन्होंने कहा कि जिले में ऐसे प्रकरणों की बहुलता को देखते हुए वह ऐसे मामलों को लेकर बहुत गंभीर हैं। यदि किसी भी व्यक्ति के साथ बैनामा अथवा वसीयत के आधार पर ठगी की गई हो तो वह उनके समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है। प्रकरण में जांच करवाकर दोषी व्यक्तियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में अभियोग दर्ज करवाकर कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जरूरत पड़ने पर उन्हें अपेक्षित सुरक्षा भी प्रदान की जाएगी।

आवश्यकता है संवाददाताओं की
तेजी से उभरते न्यूज पोर्टल www.hindustandailynews.com को गोंडा जिले के सभी विकास खण्डों व समाचार की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों तथा देवीपाटन, अयोध्या, बस्ती तथा लखनऊ मण्डलों के अन्तर्गत आने वाले जनपद मुख्यालयों पर युवा व उत्साही संवाददाताओं की आवश्यकता है। मोबाइल अथवा कम्प्यूटर पर हिन्दी टाइपिंग का ज्ञान होना आवश्यक है। इच्छुक युवक युवतियां अपना बायोडाटा निम्न पते पर भेजें : jsdwivedi68@gmail.com OR 9452137310 (WhatsApp)
जानकी शरण द्विवेदी
