Wednesday, February 11, 2026
Homeउत्तर प्रदेशफर्जी जमानत मामला : कानपुर के बाहर भी सक्रिय है गिरोह, आरोपितों...

फर्जी जमानत मामला : कानपुर के बाहर भी सक्रिय है गिरोह, आरोपितों के काल डिटेल से मिले अहम सुराग

गिरोह में अपराधी, माफिया, जमानतदार और अधिवक्ता शामिल

कानपुर (हि.स.)। अपराधियों को जेल से फर्जी जमानत के जरिये छुड़वाने वाले पांच सदस्यों की गिरफ्तारी से गिरोह का पर्दाफास हुआ है। सदस्यों की काल डिटेल से क्राइम ब्रांच को अहम सुराग हाथ लगे हैं। जांच में सामने आया कि फर्जी जमानत गिरोह का नेटवर्क कानपुर ही नहीं आसपास के जनपदों में सक्रिय है। गिरोह में अपराधी, माफिया, जमानतदार और अधिवक्ता भी शामिल हैं जो ठेका लेकर अपराधियों को फर्जी जमानत के दस्तावेज तैयार कर जेल से छुड़वाने का काम करते हैं।

अपर पुलिस आयुक्त आनंद प्रकाश तिवारी कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में चार्ज संभालते ही फर्जी जमानतगीर गिरोह का पर्दाफाश किया था। हालांकि क्राइम ब्रांच की टीम काफी दिनों से इस गिरोह को लेकर साक्ष्य एकत्र कर रही थी। पांच सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने सभी से अलग-अलग पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक औरैया के वृंदावन व सुरेंद्र से पूछताछ में सामने आया कि अपराधी, माफिया, जमानतदार और अधिवक्ताओं का यह गठजोड़ है, जो अपराधियों से मोटी रकम लेकर जेल से जमानत के जरिये छुड़ाने का ठेका लेते हैं। इनका नेटवर्क कानपुर ही नहीं आसपास के जनपदों में भी फैला है और उन अपराधियों से संपर्क करते हैं जिनकी जमानत लेने से लोग बचते हैं। रुपया तय होने के बाद यह लोग फर्जी दस्तावेज तैयार करते हैं और जिस जमानतदार को खड़ा करते हैं उसका कोई भी दस्तावेज सही नहीं होता है। क्राइम ब्रांच ने आरोपितों के फोन काल डिटेल से सैकड़ों लोगों को चिन्हित किया है, जिनके खिलाफ जल्द कार्यवाही होगी।

एसआईटी ने तीन सौ अधिक लोगों की बनाई थी सूची

पिछले वर्ष विशेष न्यायालय (गैंगस्टर एक्ट) के लिपिक की ओर से कोतवाली में मुकदमा लिखाया गया था कि बहुत से अपराधियों के जमानदारों का वेरीफिकेशन नहीं हो पा रहा है। इस पर तत्कालीन डीआईजी डा. प्रीतिंदर सिंह ने एसआईटी का गठन किया था। टीम की जांच में 19 जमानतदार व 82 अपराधियों के नाम सामने आए थे। ज्यादातर जमानतदार बिठूर, चौबेपुर क्षेत्रों के रहने वाले थे। उन्होंने अपने बयान में बिठूर के एक अधिवक्ता का भी नाम बताया था, जो उन्हेंं जमानत देने के बदले रकम देता था। हालांकि पुलिस ने पुख्ता सुबूत न होने के कारण उस अधिवक्ता को आरोपित नहीं बनाया था, लेकिन प्रकाश में आए 61 आरोपितों को सलाखों के पीछे पहुंचाया था। इसी के साथ पूर्वी व दक्षिण जोन के जिन ढाई सौ लोगों की सूची बनी थी अब उनके खिलाफ भी सुबूत जुटाए जा रहे हैं।

RELATED ARTICLES

Most Popular