कानपुर(हि.स.)। फरवरी में तापमान बढ़ने से गेहूं के उत्पादन पर गहरा असर पड़ सकता है। कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ.एस.एन. सुनील पांडे ने बताया कि तेजी से बढ़ रहा तापमान गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। मार्च में होने वाली गर्मी अभी फरवरी में ही पड़नी शुरू हो गई है और यह गेहूं की फसल के लिए ठीक नहीं है। जलवायु परिवर्तन के असर के चलते मौसम में हो रहे बदलाव का सभी फसलों पर असर पड़ता है। मार्च तक हल्की ठंड रहने के कारण दाना पूरी तरह से फैलता है लेकिन अभी जो गर्मी पड़ रही है, उससे दाने का वजन कम हो जाता है। साथ ही पैदावार घट जाती है और यदि इसी तरह की गर्मी अगले कुछ दिन और जारी रहती है तो निश्चित रूप से हरियाणा- पंजाब समेत कई जगहों पर गेहूं की पैदावार पर असर पड़ेगा।
गेहूँ की फसल पर गरमी का कहर जारी है जिसकी निगरानी और किसानों की मदद के लिए सरकार ने सोमवार को एक कमेटी का गठन किया है। कमेटी की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि आयुक्त करेंगे। नेशनल क्रॉप फोरकास्ट सेंटर (एनसीएफसी) के फरवरी में तापमान के सामान्य से बहुत अधिक रहने के पूर्वानुमान के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है।
गेहूं उत्पादक राज्यों के प्रतिनिधि होंगे शामिल
कृषि वैज्ञानिक कहना है कि अगले दो दिनों तक गुजरात, जम्मू, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में तापमान सामान्य से अधिक रहेगा। बढ़ते तापमान की वजह से गेहूं की फसल पर मंडरा रहे खतरे की निगरानी के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्रालय की गठित कमेटी किसानों को जल्दी से जल्दी ही सूक्ष्म सिंचाई करने की सलाह देगी।
गेहूं की कई राज्यों में कटाई शुरू
रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की कई राज्यों में कटाई भी शुरू हो गई है। खासतौर पर गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में कटाई चालू है। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में दिन का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास चल रहा है। जबकि रात का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास है। कृषि वैज्ञानिकों की नजर में रात का तापमान सामान्य से अधिक होने से स्थितियां और खराब हो सकती है।
राम बहादुर
