Sunday, April 5, 2026
Homeउत्तर प्रदेशफतेहपुर : भक्तों की आस्था का केन्द्र शिवराजपुर की कतकी का मेला

फतेहपुर : भक्तों की आस्था का केन्द्र शिवराजपुर की कतकी का मेला

-कृष्ण भक्त मीराबाई द्वारा स्थापित गिरधर गोपाल का मंदिर धार्मिक आकर्षण केन्द्र  -प्राचीन मंदिरों की नगरी छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध गंगा तट पर बसा है प्राचीन शिवराजपुर गांव
-हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा को लगता सात दिन का भव्य मेला

फतेहपुर (हि.स.)। धार्मिक ग्रंथों में छोटी काशी का गौरव हासिल किए यहां गंगा तट पर स्थित शिवराजपुर में मीराबाई के गिरधर गोपाल का मंदिर भक्तों के लिए आज भी आस्था और विश्वास का केंद्र बना  हुआ है। कार्तिक पूर्णिमा पर यहां हर वर्ष सात दिनों तक चलने वाला मेला लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि मेले में आकर लोग गंगा स्नान के बाद अपने आराध्य गिरधर गोपाल का दर्शन लाभ प्राप्त करते हैं।
गंगा तट पर मोहन की बावरी मीराबाई ने अपने अराध्य गिरधर गोपाल कृष्ण की मूर्ति स्थापित की थी। इस पावन स्थल पर काफी दिनों तक रुककर मीराबाई भगवान कृष्ण की भक्ति में डूबी रहीं। किवंदती है कि मीराबाई अपने साथ गिरधर गोपाल की मूर्ति लेकर यहां आईं और कुछ दिन रुक कर भजन किया। जब वह गिरधर गोपाल की मूर्ति साथ ले जाने के लिए उसे उठाने की कोशिश किया तो वह अपने स्थान से नहीं हिली। इस पर उन्होंने इसी स्थान पर मूर्ति स्थापित कर दी। 

राष्ट्रीय राजमार्ग के छह किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थिति गंगा तट का शिवराजपुर गांव धार्मिक ग्रंथों में छोटी काशी के रूप में प्रसिद्ध है। यहां के पुराने मंदिरों के अवशेष शैव नगरी को प्रमाणिक करते हैं। गंगा की अद्भुत छटा के बीच यहां छोटे-बड़े मंदिरों की लंबी श्रृंखला है। यहां के प्राचीनतम मंदिरों में सिद्धेश्वर, कपिलेश्वर, अंगदेश्वर, पंचवटेश्वर, मुंडेश्वर, भैरवेश्वर, शगुनेश्वर, रसिक बिहारी मंदिर आदि हैं।
चित्तौड़गढ़ के राजा ने शिवराजपुर में बनवाया था भव्य गिरधर गोपाल मंदिरगिरधर गोपाल मंदिर के बारे में मनोज पाण्डे ने बताया कि “मेरो तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोय” जैसे भजनों में डूबी रहने वाली मीराबाई के जाने के बाद चित्तौड़गढ़ के राजा ने शिवराजपुर में गिरधर गोपाल का भव्य मंदिर बनवाया। बताते हैं कि राजा साल में एक बार मंदिर के दर्शन के लिए जरूर आते थे। मंदिर की देखरेख, पूजा व प्रसाद के लिए सत्तर के दशक तक रजवाड़े से धन आता रहा। अब न धन आता है और न ही वहां से कोई व्यक्ति गिरधर गोपाल के दर्शन करने आता है। यह सिलसिला कब टूटा पता नहीं।
भक्त रमाकांत द्विवेदी बताते हैं कि ऐसी मान्यता है कि दुर्वासा ऋषि ने भी यहां आकर तपस्या किया थी। गंगेश्वर शिव मंदिर की प्रमाणिकता इसलिए अधिक है कि यहां स्थित शिवलिंग सुबह पूजा हुआ मिलता है। कहा जाता है कि अश्वत्थामा यहां आकर पूजा करते हैं। इस पौराणिक स्थल के महत्व के चलते ही वर्ष 1872 में आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद जी सरस्वती ने यहां एक वर्ष रहकर साधना की थी। 
 यहां के आकर्षक का मुख्य केंद्र शिवराजपुर की कतकी का मेला विशिष्ट धार्मिक महत्व रखता है। जगेश्वर पटेल ने मेले के महात्म्य को बताते हुए कहते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा को लगने वाले इस मेले में जिले के अलावा आसपास के जनपदों के लोग भी मेला देखने आते हैं। गंगा माता के स्नान के बाद भक्त मंदिर में गिरधर गोपाल की पूजा अर्चना करते हैं। बाद में मेला में घूम-घूमकर दिनभर आनंद लेते हैं। मेले में विसातखाने, पत्थर और काष्ठ निर्मित उत्पादों के साथ ऊँट, गधे व घोड़े का बाजार भी सजता है। इन पशुओं का जिले में एकमात्र मेला लगता है जिससे दूर दूर लोग इन पशुओं की खरीदारी करने आते हैं। लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण मेले की रौनक शायद पहले जैसी देखने को न मिले। बुंदेलखंड समेत उन्नाव, रायबरेली से लोग यहां आते हैं। कतकी के मेला का उत्तर प्रदेश के गजेटियर में शिवराजपुर मेले के रूप में स्थान मिला है।
 

RELATED ARTICLES

Most Popular