– बीज व भूमि शोधन ही रोगों से फसलों को बचाने का एकमात्र विकल्प
फतेहपुर (हि.स.)। रबी की फसल की बुआई के पहले किसान बीज व भूमि का शोधन कर लें तभी बीज व भूमि जनित रोगों से फसल को बचाया जा सकता है और बेहतर उपज मिल सकेगी। उक्त बातें शुक्रवार को जिला कृषि अधिकारी आरपी कुशवाहा ने किसानों से अपील करते हुए कहीं।
जिला कृषि रक्षा ने बताया कि बीज व भूमि जनित रोगों से बोई जाने वाली फसल के बचाव के लिए बीज शोधन व भूमि शोधन का अत्याधिक महत्व है। इससे फसल की रोगों से सुरक्षा की जा सकती है और अधिक पैदावार भी ली जा सकती है।
बताया कि आगामी रबी फसल में बेहतर उत्पादन के बीज शोधन अवश्य करें। बीज शोधन के अभाव में फसलों में कई फफूंद व जीवाणु जनित रोगों का प्रकोप देखा जाता है। रोगकारक फफूंदी व जीवाणु बीज से लिपटे रहते हैं या भूमि पर पड़े रहते हैं। बीज बोने के बाद फफूंदी अपने स्वभाव के अनुसार नमी प्राप्त होते ही उगते बीज अंकुरे या पौधे के विभिन्न भागों को संक्रमित करके रोग उत्पन्न करते हैं। गेहूं में करनाल बंद अनावर्त्त कंडुवा, जौ में पत्तीधारी रोग, चना, मटर, मसूर में उकठा रोग, राई, सरसों में झुलसा, तुलसिता, सफेद गेरूई, आलू में ब्लैक स्कर्फ, ब्राउन राठ, गन्ना में लाल सड़न जैसी बीमारियों का प्रकोप देखने को मिलता है।
बताया कि रोगों से फसलों को बचाने के बीज उपचार व बीजाशोधन ही एकमात्र सरल रास्ता है। वह सुरक्षात्मक उपाय है। बीज शोधन के लिए फफूंदीनाशक रसायनों जैसे थीरम 75 प्रतिशत डब्ल्यू0एस0 2.5 ग्राम अथवा कार्बण्डजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यू0पी0 03 ग्राम रसायन प्रति किलोग्राम अथवा कार्बकिसन 37.5 किलोग्राम प्रति 03 ग्राम रसायन अथवा टेबूकोनाजोल 2% डी0एस0 प्रति किलोग्राम बीज की दर से एवं बायोपेस्टिसाइड्स जैसे ट्राइकोडरर्मा हारजेनियम 05 ग्राम प्रति किलोग्राम अथवा ट्राइकोडरर्मा विरडी 01 प्रति डब्ल्यू.पी.का 05 ग्राम अथवा मेटालेकिसन 35 प्रति डब्ल्यू. एस.2 ग्राम अथवा स्ट्रेप्टोमाइसिन 90 प्रति-टेट्रासकिलन हाइड्रोक्लोराइड 10 प्रति अथवा सूडेमोनाश फ्लोरेसेस 0.5 प्रति डब्ल्यू0एस0 का 01 किलोग्राम कुंतल की दर से उपचारित कर बुवाई करना चाहिए। बीजशोधन के लिए ट्राइकोडरमा हारजेनियम जनपद की समस्त कृषि रक्षा इकाईयों पर एवं कृषि रक्षा रसायन थीरम कार्बेंडाजिम ट्राइकोडरमा हारजेनियम स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट आदि समस्त विकासखंड के कृषि रक्षा से संबंधित निजी प्रतिष्ठानों पर उपलब्ध है।
किसानों से अपील करते हुए बताया कि किसान भाई उक्त कीट व रोग के लगने की दशा में रोगाग्रस्त फसल या पौधे के फोटो के साथ विभागीय पी.सी.एस.आर.एस मोबाइल नंबर 9452247111 एवं 9452257111 पर व्हाट्सएप अथवा टेक्स्ट मैसेज के माध्यम से शिकायत कर सकते हैं। किसान भाइयों को समस्या के साथ अपना पूरा नाम, पता, ग्राम, विकास खंड एवं तहसील आदि का नाम भी अंकित करना होगा। समस्या का समाधान 48 घंटे के भीतर कर दिया जाएगा। किसान भाई कृषि रक्षा रसायन के माध्यम से कीट व रोगों से अपनी फसल का बचाव व उपचार करते हुए अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।
