Wednesday, March 4, 2026
Homeविधि एवं न्यायप्रिंसिपल को पदावनत करने पर विभागीय अधिकारियों पर लगा 50 हजार रुपये...

प्रिंसिपल को पदावनत करने पर विभागीय अधिकारियों पर लगा 50 हजार रुपये का हर्जाना

प्रयागराज (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नियमानुसार जांच किए बगैर प्रभारी प्रधानाध्यापक को पदावनत कर मूल वेतन पर भेजने के आदेश को गैरकानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया है। साथ ही अध्यापक को उनके सभी बकाया वेतन व एरियर का भुगतान छह सप्ताह में करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर 50 हजार हर्जाने की रकम का भुगतान छह सप्ताह में नहीं हो जाता तो साढ़े सात प्रतिशत ब्याज की दर से भुगतान करना होगा और सरकार चाहे तो ब्याज की रकम की वसूली जिम्मेदार अधिकारियों से कर सकती है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने हाथरस के प्रदीप कुमार पुंडीर की याचिका स्वीकार करते हुए दिया है।

याची के अधिवक्ता का कहना था कि बेसिक शिक्षा अधिकारी हाथरस ने याची के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उसे पदावनत करते हुए मूल पद और मूल वेतन पर भेज दिया। याची ने इसके खिलाफ सचिव बेसिक शिक्षा प्रयागराज के समक्ष अपील दाखिल की। सचिव ने भी बीएसए के आदेश को सही ठहराते हुए याची की अपील खारिज कर दी। इस पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने अधिकारियों से याची के खिलाफ की गई जांच की रिपोर्ट तलब की तो बताया गया कि कोई जांच नहीं की गई है और न ही कोई रिपोर्ट उपलब्ध है। कोर्ट का कहना था कि याची के खिलाफ कार्यवाही यूपी बेसिक एजुकेशन टीचर सर्विस रूल 1973 और यूपी गवर्नमेंट सर्विस (डिसिप्लिन एंड अपील रूल्स 1999) के नियमों के तहत की जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया इसलिए बीएसए का आदेश अवैधानिक हैं।

कोर्ट ने बीएसए हाथरस और सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज के आदेश को रद्द करते हुए याची को उसके पद पर बहाल करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि याची को जो भी वेतन मिल रहा था, वही वेतन और बकाया का भुगतान छह सप्ताह में किया जाए। याची को हर माह का वेतन नियमित रूप से दिया जाए।

आर.एन

RELATED ARTICLES

Most Popular