-पाण्डुलिपियां हमारे राष्ट्र की धरोहर हैं : डॉ. अरुण कुमार
-नाथ पंथ के प्रतिपादक महायोगी गुरु गोरक्षनाथ : प्रो. रविशंकर
प्रयागराज (हि.स.)। आज जो योग हम लोग करते हैं वह सब गोरक्षनाथ की देन है। महर्षि पतंजलि ने योग के सिद्धांत को बताया तो क्रिया रूप गुरु गोरक्षनाथ और जालंधर नाथ द्वारा बताया गया है। इसीलिए अनेक आसन इनके नाम पर हैं। प्रयागराज नाथ पंथ के योगियों के लिए विशिष्ट स्थान रखता है। यह बातें उड़ीसा से आए महन्त शिवनाथ योगी ने हिन्दुस्तानी ऐकेडमी में कहीं।
हिन्दुस्तानी एकेडेमी एवं राजकीय पाण्डुलिपि पुस्तकालय संस्कृति विभाग, प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में आजादी का अमृत महोत्सव आयोजन की शृंखला में शुक्रवार को एकेडेमी स्थित गांधी सभागार में नाथपंथ पर केन्द्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। महंत ने बताया कि गोरक्षनाथ कबीर तथा शंकराचार्य के पहले विद्यमान थे। यहां झूंसी में महायोगी गुरु गोरखनाथ एवं मत्स्येन्द्रनाथ स्वयं आए थे तथा गम्भीरनाथ ने यहां आकर घोर तपस्या की थी।
मुख्य वक्ता डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी ने कहा कि नाथ पंथ आदिनाथ भगवान शिव के उपदेशों पर आधारित है। उन्होंने प्राचीन पाण्डुलिपियों पर चर्चा करते हुए कहा कि पाण्डुलिपियां हमारे राष्ट्र की धरोहर हैं, इसी के द्वारा हम अपने राष्ट्र की बौद्धिक संपदा को संजो कर रखते हैं। कुछ वर्ष पहले जब आयुर्वेद में हल्दी और नीम के लिए विदेश में पेटेंट कराने की होड़ मची थी, तब हमारी यही पांडुलिपियां हमने साख के रूप में प्रस्तुत कर विजय प्राप्त की थी।
अध्यक्षता करते हुए महायोगी गुरु गोरक्षनाथ शोधपीठ दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के विशेष कार्याधिकारी प्रो. रविशंकर सिंह ने कहा नाथ पंथ का मुख्यतः दार्शनिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक आयाम निर्धारित किया जा सकता है। नाथ पंथ के प्रतिपादक महायोगी गुरु गोरक्षनाथ हैं। महायोगी गुरु गोरखनाथ ने किसी दार्शनिक मत का खंडन नहीं किया है, बल्कि तत्कालीन समय में प्रचलित दार्शनिक मतों का शुद्धिकरण किया है। विश्व में हठयोग की विधियों का रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उपयोग हो रहा है। नाथ पंथ प्राचीन काल में जितना प्रासंगिक था उतना ही आज भी उपयोगी है।
इसके पूर्व एकेडेमी सचिव देवेन्द्र प्रताप सिंह ने स्वागत भाषण में कहा कि नाथपंथ तथा उसके सामाजिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक आयामों को पूरी दुनिया को जानना चाहिए। आज जब सारी दुनिया में लोग अवसाद तथा तनाव से ग्रसित हो रहे हैं तो ऐसे समय में योग उन्हें नई ऊर्जा देने का कार्य कर रहा है। नाथ पंथ का सामाजिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक आयाम हमारी सांस्कृतिक पहचान ही हमारी ऊर्जा है। योग और हठ योग शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में लाभकारी है।
संचालन एकेडेमी प्रकाशन अधिकारी ज्योतिर्मयी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन गुलाम सरवर (पाण्डलिपि अधिकारी, राजकीय पाण्डुलिपि पुस्तकालय, संस्कृति विभाग उप्र, प्रयागराज) ने किया। कार्यक्रम में प्रो.वी.के सिंह, प्रभाशंकर पाण्डेय (पूर्व विधायक), डॉ.मानेन्द्र प्रताप सिंह, दुर्गेश कुमार सिंह, अतुल द्विवेदी, हरिश्चन्द्र दुबे, डॉ. शकिरा तलत, डॉ.शान्ति चौधरी, डॉ.राम नरेश पाल, राकेश कुमार वर्मा, डॉ.पीयूष मिश्र ‘पीयूष’, उमेश श्रीवास्तव सहित शोधार्थी एवं शहर के विद्वान आदि उपस्थित रहे।
विद्या कान्त
