Thursday, February 19, 2026
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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हुआ उत्तर प्रदेश : श्रीकान्त

– चार साल पहले पावर लेस यूपी, अब है सरप्लस पावर स्टेट
– चार साल में दिए 1.30 लाख मजरों के 1.38 करोड़ घरों को कनेक्शन- 2022 तक 7,260 मेगावॉट बढ़ जाएगी विद्युत उत्पादन क्षमता- 1.36 लाख किसानों को दिए ट्यूबवेल कनेक्शन- लाइन लॉस होगा 15 प्रतिशत से नीचे मिलेगी 24 घंटे बिजली- गांवों में पहुंचाई 54 प्रतिशत ज्यादा बिजली- कृषि फीडरों पर निर्बाध 10 घंटे आपूर्ति

लखनऊ (हि.स.)। उप्र सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर शुक्रवार को प्रदेश के ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री श्रीकान्त शर्मा ने अपने विभाग की उपलब्धियों को गिनाया। कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले चार वर्षों से ‘उपभोक्ता देवो भवः’ की नीति पर गरीब-किसान हितैषी सरकार काम कर रही है। चार वर्षों की भाजपा सरकार में 1.30 लाख मजरों के 1.38 करोड़ घरों का अंधियारा दूर किया है वहीं गांवों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कराकर पलायन को भी रोका है। 
बताया कि जहां पिछली सरकारों में उत्तर प्रदेश को जरूरत के लिए बिजली नहीं मिलती थी, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की नीतियों से यूपी सरप्लस पावर स्टेट बना है। आज गांवों को पिछली सरकारों की तुलना में 54 प्रतिशत ज्यादा बिजली मिल रही है। जिला मुख्यालय को 24, तहसील मुख्यालय को 20 और गांवों को 18 घंटे बिजली का रोस्टर लागू है। किसानों को भी सिंचाई के लिए रतजगाई नहीं करनी पड़ती। अलग हुए कृषि फीडरों पर सुबह 7 से शाम को 5 बजे तक निर्बाध 10 घंटे की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। 
श्री शर्मा अपने संकल्प को बताते हुए कहा कि पिछले वर्षों हम प्रदेश के हर घर को बिजली पहुंचाने के लक्ष्य पूरा किया, अब हर घर को 24 घंटे बिजली मिले, इस संकल्प को चरित्रार्थ करने में जुटे हैं। बताया कि यह भी सुनिश्चित किया है कि जिन भी फीडरों का लाइन लॉस 15 प्रतिशत से कम होगा, वहां 24 घंटे बिजली दी जाएगी। साथ ही वहां ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने के साथ ही जर्जर तार भी प्राथमिकता में बदले जाएंगे। 
 पूर्ववर्ती सपा सरकार पर आरोप लगाया कि 5.14 रू- 11.09 रू की दर से दीर्घकालिक पीपीए किये और जनता पर मंहगी बिजली थोपी। जबकि भाजपा सरकार ने सस्ती बिजली के अभियान के तहत 2.98 रू- 4.19 रू की दर से पीपीए किये। लाइन हानियां कम करके हम सस्ती बिजली की उपलब्धता के अन्य विकल्पों पर काम कर रहे हैं। 
बताया कि किसानों के हित में हमने डार्क जोन के नाम पर ट्यूबवेल कनेक्शन रोके जाने की पूर्ववर्ती सरकार के किसान विरोधी आदेश को रद्द किया। प्रतिवर्ष 45,592 के औसत से सिंचाई के लिए किसानों को नलकूप कनेक्शन दिए गए। तीन साल में 1,36,775 नए नलकूप कनेक्शन दिए। सपा सरकार के कार्यकाल में 2012-17 के बीच प्रतिवर्ष केवल 19880 नलकूप कनेक्शन ही दिए जा रहे थे। 
अपने विभाग की उप​लब्धियों को बताते हुए कहा कि प्रदेश को निर्बाध व ट्रिपिंग फ्री विद्युत आपूर्ति के लिए 662 नए 33/11 उपकेंद्र बनाये गए। 1234 उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाई गई है। अब तक कुल 11983 सर्किट किमी वितरण लाइनों का निर्माण किया गया है। अप्रैल 2017 से अबतक कुल 8.30 लाख शिकायतें ट्रांसफार्मरों के खराब होने की मिली हैं। इनमें कुल 99.94 प्रतिशत ट्रांसफार्मर तय समय में बदले जा चुके हैं। इस अवधि में 1912 टॉल फ्री नंबर पर आई कुल 14.19 लाख शिकायतों में 14.13 लाख यानि कुल 99.59 प्रतिशत शिकायतों का समाधान तय समय पर हुआ है। 
प्रदेश की ट्रांसमिशन क्षमता वर्ष 2016-17 के 16,348 मेगावॉट से 9000 मेगावॉट बढ़कर अब 25,000 मेगावॉट हो चुकी है। वर्ष 2025 तक प्रदेश में यह क्षमता 32,400 मेगावॉट होगी। आयात क्षमता भी वर्ष 2016-17 के 7800 मेगावॉट के मुकाबले 6800 मेगावॉट बढ़कर अब 14,600 मेगावॉट हो गई है।
बताया कि उप्र में सभी विधाओं की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 26,937 मेगावाट है। 2024 तक इसमें 8262 मेगावॉट की वृद्धि होगी। वर्ष 2022 तक ऊर्जा विभाग के राज्य तापीय विद्युतगृहों का उत्पादन 7,260 मेगावॉट बढ़कर 12734 मेगावॉट हो जाएगा और 34,500 मेगावॉट बिजली की उपलब्धता रहेगी। 
सौभाग्य योजना के तहत पश्चिमांचल, दक्षिणांचल एवं मध्यांचल के 12786 मजरों में आरईसी व पीएफसी के 1445 करोड़ रूपये के लोन से 24885 किमी जर्जर लाइनों व अन्य योजनाओं में 11092 किमी लाइनों को ए.बी.सी. में बदला जा चुका है। ए.डी.बी. के तहत पूर्वांचल के 15334 व मध्यांचल के 11299 मजरे चिह्नित किये गए हैं। यह कार्य 1 अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2023 तक के बीच पूरा हो जाएगा।
1000 एवं अधिक आबादी वाले सभी गांवों में खुले तारों को एबी केबलिंग से बदलने की प्रक्रिया चल रही है। अंडरग्राउंड केबलिंग के कार्यों के तहत 19 जनपदों की 22 परियोजनाओं में 6035.70 किमी एलटी व 924.98 किमी एचटी लाइन बिछाई जा चुकी है। 
उन्होंने बताया कि कोविड की विपरीत परिस्थितियों में प्रदेश के औद्योगिक एवं वाणिज्यिक श्रेणियों उपभोक्ताओं का एक माह के फिक्स चार्ज माफ किया। इसके तहत कुल 342.68 करोड़ रूपये की मदद की गई। वाणिज्यिक व निजी श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए पहली बार सरचार्ज माफी की योजना सरकार लेकर आई जिसमें 1.93 लाख उपभोक्ताओं के बिजली बिलों पर लगे सरचार्ज माफ किये गए। 
घरेलू व कृषक उपभोक्ताओं के लिए भी वर्तमान में ‘कोविड-19 एकमुश्त समाधान योजना’ संचालित की जा रही है। जिसमें 31 मार्च 2021 तक पंजीकरण कराने व तय समय में बिलों का भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं का 31 जनवरी 2021 तक का सरचार्ज माफ किया जाएगा।

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