Sunday, February 15, 2026
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प्रधानमंत्री ने वीरभूमि महोबा की महिलाओं से किया सीधा संवाद, उज्जवला लाभ की ली जानकारी

महोबा (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को उज्जवला योजना के द्वितीय चरण का शुभारम्भ बटन दबाकर बुन्देलखण्ड की वीरभूमि महोबा से किया। इस दौरान उन्होंने प्रथम चरण में उज्जवला योजना से लाभान्वित हुई विभिन्न प्रदेशों की 05 महिलाओं से सीधा संवाद करते हुए उनसे उज्वला के लाभ और उसे प्राप्त करने में होने वाली परेशानियों की जानकारी ली। महिलाओं ने उन्हें अपनी उमर तक लग जाने की कामना की।

उन्होंने इस क्रम को देवभूमि उत्तराखंड से शुरु किया। देहरादून की बूंदी देवी से पूछा बताइए उज्जवला से क्या लाभ हुआ ? इस पर बूंदी ने बताया कि वह पहले जंगल से लकड़ी लाकर खाना बनाती थी। उज्जवला कनैक्शन मिल जाने के बाद से अब वह सुखद अनुभव करती हैं। उन्होंने एक गाय पाली है, उस पर भी ध्यान दे पाती हैं। साथ ही अपने बुजुर्ग पिता की भी सेवा करने का समय निकाल लेती हैं। पीएम बोले आपने 22 रिफिल कराए क्या अन्य लोगों को भी इसके लाभ के बारे में बताया। उन्होंने कहा बिल्कुल, पूछा पिता क्या करते थे आपके। आप उनकी सेवा करती हैं। आपने उन लोगों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया जो बेटी के स्थान पर बेटे को ज्यादा महत्व देते हैं। आपको प्रणाम करता हूं। आप जैसी बहनों का आभार।

प्रधानमंत्री ने गोवा से एकता से की बात। एकता ने बताया कि पहले वह जंगल से लकड़ी लाकर खाना पकाती थी। लकड़ी गीली भी होती थी। इसके कारण समय पर खाना नहीं बनता था। अब समय पर खाना बन पाता है। और बच्चे भी खुश हैं क्योंकि उन्हें भी समय दे पाती हूं। पीएम ने पूछा लॉक डाउन में योजना से मदद मिली। उन्होंने कहा कि उन्हें उज्जवला से खूब मदद मिली। पूंछा कि कनेक्शन बिचैलियों से मिला या सीधे। इस पर एकता ने बताया कि उन्हें सीधे ही कानेक्शन मिल गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने चुटकी ली कि पहले की सरकारों की हालत इतनी खराब थी कि संसद में सिलेंडरों की चर्चा हुआ करती थी।

प्रधानमंत्री ने पंजाब के अमृतसर से आशा से बात की। पीएम ने पूछा कैसे हैं आप, आपको उज्जवला सिलेंडर प्राप्त करने में परेशान होना पड़ा या आराम से मिल गया। उन्होंने कहा कि आपका तहेदिल से धन्यवाद। हमें कनेक्शन आराम से ही मिल गया था। मोदी जी ने अपने अंदाज में फिर पूछा कि पहले और अबके समय के अनुभव बताइए। इस पर आशा ने बताया कि पहले बाजार से लेते थे लकड़ी, अब समय बच जाता है। बच्चों के साथ समय दे पाती हूं। पीएम ने कहा हमें खुशी है।

यूपी के गोरखपुर से किरन जी से प्रधानमंत्री ने पूछा किसको बिठाया है साथ में। उन्होंने कहा कि बेटी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि परिवार के लोग क्या करते हैं। पूंछा गैस कैसे मिला। पूछा बेटी गैस पर खाना बनाती है। किरण ने बताया कि पहले हम थक जाते थे खाना बनाने में परेशानी होती थी पर अब ऐसा नहीं है। किरन ने बताया कि वह स्वयं सहायता समूह में भी काम करती है। लाॅकडाउन में कुछ समूहों की पूंजी फंस गई है। उन पर कृपा करने को भी कहा। प्रधानमंत्री ने पूछा कि स्वयं सहायता समूह के बारे में अन्य को जानकारी दी या नहीं। गरीबों के लिए अनाज मिल रहा है। इसके बाद उन्होंने किरन की बेटी से पूछा,बेटी कुछ कहना चाहती हो,खेल कूद में भाग लेती हो। उसने कहा नहीं लिया। किरन ने प्रधानमंत्री को अपनी उम्र लग जाने का आशीर्वाद दिया।

प्रधानमंत्री ने मप्र के भोपाल से सुनीता वैष्णो से की बात। उनसे पूछा कब मिला सिलेंडर ? इस पर सुनीता ने बताया कि सितंबर 2018 में। कहा क्या हुआ लाभ ? इस पर सुनीता ने बताया कि अब समय बच जाता है। साथ ही विश्वव्यापी कोरोना के चलते हुए लॉक डाउन में 03 माह तक फ्री सिलेंडर मिलने की भी बात सुनीता ने बताई। पीएम ने कहा हमारी कोशिश है कि गरीबों का चूल्हा हर हाल में जलता रहे। लकड़ी का नहीं गैस का।

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