किसानों के अपमान का आरोप लगा जनसभा के बहिष्कार की अपील
वाराणसी में प्रियंका गांधी की रैली से सरकार हिल गई
वाराणसी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जनसभा के लिए 40 बीघे खड़ी फसल को काटकर जमीन को समतल बनाने पर कांग्रेस ने विरोध जताया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व विधायक अजय राय ने लोगों से प्रधानमंत्री की रैली को बहिष्कार करने की अपील कर कहा कि धान की बाली फूट रही है। ऐसी फसलों को काट कर वहां राजनीतिक रैली करना एक नैतिक अपराध है। भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री की रैली के लिए ये काम राजनीतिक और सरकारी अनैतिकता का अत्यन्त निन्दाजनक कृत्य है।
लहुराबीर महामंडल नगर स्थित अपने आवास पर सोमवार को मीडिया से रूबरू अजय राय ने कहा कि किसानों की खड़ी फसल कटवाकर सरकार और जिला प्रशासन किस आधार पर मुआवजा दे रही है,इसे भी बताये। क्या मुआवजा किसानों के लागत मूल्य पर दिया गया या फिर फसल के मूल्य पर। उन्होंने कहा कि 40 बीघे में कम से कम 600 कुन्तल धान पैदा होता। पूर्व विधायक ने कहा कि हर चीज का समाधान मुआवजा नहीं हो सकता। सरकार मानवीय और सामाजिक आधार को भी देखे।
कहा कि कोई लोगों की जिन्दगी ले ले या फिर जीवन देने वाली अन्नपूर्णा मां को काट ले। हर जगह मुआवजे की रकम अदा कर कर्तव्य की इतिश्री मान लेने का चलन भाजपा सरकार की सोच को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि अपने को भारत की संस्कृति की पोषक और कभी खुद को ‘पार्टी विद द डिफरेंस’ बताने वाली भाजपा की सरकार, इस तरह राजनीतिक लाभ के लिए बाजारीकरण के अनैतिक एवं विद्रूप हथकंडों की प्रतीक बन चुकी है। भारत की संस्कृति में अनाज के दाने को अन्नपूर्णा मां मानकर पूजा जाता है और अनाज का गिरा दाना भी उठाकर माथे लगाया जाता है। साथ ही अनाज की फसलों एवं फल लगे हुए वृक्षों की पूजा की जाती है। इस सांस्कृतिक धर्म की और खेत में खड़ी फसल की हत्या महज राजनीतिक उद्देश्य से एक ग्रैंड शो का दिखावे करने के लिए सरकार द्वारा की जा रही है।
पूर्व विधायक अजय राय ने कहा कि वाराणसी में कांग्रेस की सफल रैली से भी बड़ी रैली करना, सूबे की भाजपा सरकार के लिए राजनीतिक प्रतिष्ठा का विषय बना हुआ है, लेकिन रैली के लिए तो बड़े मैदान और भी हैं। अगर नहीं भी हैं, तो उतनी ही बड़ी या कुछ छोटी ही रैली कर लेने और अन्नपूर्णा के समादर धर्म का पालन करने से भाजपा सरकार की राजनीतिक शान घट नहीं जायेगी। लगभग तैयार हो चुकी खड़ी फसल को पैसे देकर नष्ट कराना अन्नपूर्णा का ही नहीं, किसान और किसान के बहे पसीने का भी अपमान है। लगातार किसान, कृषि और कृषि उत्पादन को रौंद रही सरकार के इस कारनामे की कांग्रेस कड़ी निंदा करती है।
कहा कि अभी आये ताजे वैश्विक भूख इंडेक्स में पिछड़ते जा रहे भारत का स्थान खिसक कर पाकिस्तान और नेपाल से भी पीछे बताया गया है। इन हालात में किसान के पसीने एवं पूंजी से खड़ी हुई और अनाज की हरी बालियां लग चुकी फसल को काट—काट कर वहां छद्म राजनीतिक मंसूबे के लिए जनता की गाढ़ी कमाई से रैली करना शर्मनाक ही नहीं, पाप भी है। भले ही किसानों को उनकी फसलों की कीमत प्रशासन दे रहा है, लेकिन वह जनता का ही पैसा है और उसे नैतिकता की कसौटी पर एक अक्षम्य अपराध कहा जायेगा। । वार्ता में जिलाध्यक्ष राजेश्वर पटेल, महानगर अध्यक्ष राघवेन्द्र चौबे, प्रोफेसर सतीश राय, शैलेन्द्र सिंह , डॉ. नृपेंद्र नारायण सिंह भी मौजूद रहे।
