Tuesday, April 7, 2026
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प्रदेश की 11 सीटों पर जीत-हार के अंतर से ज्यादा वोट पड़े थे नोटा पर

-पांच हजार से कम अंतर से जीत-हार वाले क्षेत्रों पर हर पार्टी कर रही गहन मंथन

लखनऊ (हि.स.)। पिछले विधानसभा चुनाव में एक जाति या मजहब के दो दिग्गजों की मजबूती के बीच तीसरे उम्मीदवार को फायदा मिला। इसी तरह कई सीटों पर वोट काटने वाले प्रत्याशियों के लिए चुनौती खड़ी हो गई। इस गुणा-भाग के बीच 44 ऐसी सीटें रहीं, जहां पर जीत-हार का अंतर पांच हजार मतों से कम रहा। प्रदेश में 11 सीटें तो ऐसी थीं, जहां जीत-हार के अंतर से ज्यादा नोटा पर वोट पड़े थे। इस बार ऐसी सीटों पर सभी दल अपने-अपने हिसाब से गुणा-भाग लगा रहे हैं।

पिछली बार नोटा का सबसे ज्यादा 16 सीटों पर सपा को नुकसान उठाना पड़ा था। वहीं, बसपा भी मामूली अंतर से 10 सीटें जीतने से चूक गई थी। प्रदेश में सबसे कम 171 वोट से डुमरियागंज में भाजपा के राघवेंद्र प्रताप सिंह जीते थे। यहां दूसरे नंबर पर थीं बसपा की सैयदा खातून। सहारनपुर की रामपुर मनिहारन सुरक्षित सीट पर भी यही हाल रहा। यहां भाजपा के देवेंद्र कुमार निम ने बसपा के रविंद्र कुमार मोल्हू को महज 595 मतों के अंतर से हराया था। यहां नोटा को 856, तो रालोद प्रत्याशी को उससे कम 695 मत मिले थे। मथुरा की मांट सीट से बसपा के श्याम सुंदर शर्मा मात्र 432 वोटों से जीते थे। यहां दूसरे नंबर पर रालोद के योगेश चौधरी रहे। यहां नोटा को एक हजार, 253 वोट मिले थे।

लखनऊ की मोहनलालगंज सुरक्षित सीट पर सपा के अंबरीष पुष्कर ने बसपा के राम बहादुर को 530 वोटों से हराया था। यहां नोटा के हिस्से में तीन हजार, 471 मत गए थे। श्रावस्ती में भाजपा के रामफेरन, सपा के मो. रमजान से मात्र 445 वोटों से जीते। ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के प्रत्याशी ने दो हजार,932 वोट पाकर सपा का खेल खराब कर दिया। मुबारकपुर में बसपा के शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली ने सपा के अखिलेश यादव को 688 मतों से हराया था। यहां पीस पार्टी समेत दो छोटे दलों ने यादव प्रत्याशी उतार कर सपा के लिए समस्या पैदा कर दी थी।

धौलाना विधानसभा सीट पर बसपा उम्मीदवार ने पिछले चुनाव में भाजपा को पटखनी दी थी पर जीत का अंतर पांच हजार वोटों से कम था। इसी तरह से मांट में बसपा ने रालोद को हराया था। आरक्षित सीट सिधौली पर भी बसपा ने सपा को पटखनी दी थी। चिल्लूपार में भाजपा उम्मीदवार नजदीकी मुकाबले में बसपा प्रत्याशी से हार गए थे। मुबारकपुर में बसपा ने सपा को हराया था। दीदारगंज में भी बसपा ने सपा को पटखनी दी थी। सुरक्षित सीट लालगंज में बसपा ने भाजपा को हराया था। ये सभी सीटें ऐसी हैं जहां जीत का अंतर पांच हजार वोटों से कम रहा था। प्रदेश की जिन 16 सीटों पर सपा पांच हजार से कम वोट से हारी थी, वहां इस बार संगठन की सक्रियता से बूथ प्रबंधन तक पर पुख्ता तैयारी की गई है। गठबंधन की वजह से करीब आधा दर्जन सीटों पर उम्मीदवार भी बदल गए हैं। सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने कहा कि इस बार कोई भी सीट नहीं हारेंगे। सपा से साथ गठबंधन में शामिल सभी दलों के कार्यकर्ता अपने स्तर पर लगे हुए हैं। हम अधिकांश सीटें जीतेंगे।

मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट पर सपा और बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे। यहां बसपा भी पूरी ताकत से लड़ी। इसका नतीजा रहा कि महज 193 मतों के अंतर से भाजपा से अवतार सिंह भड़ाना जीते थे। बिजनौर की नजीबाबाद सीट पर भी सपा और बसपा दोनों ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे। लेकिन, वोटकटवा प्रत्याशियों की वजह से भाजपा यह सीट महज दो हजार, 002 मतों के अंतर से हार गई। सहारनपुर में भाजपा चार हजार, 636 मतों के अंतर से हारी। यहां बसपा ने मुकेश दीक्षित को टिकट दिया, जिन्हें वोट तो 17 हजार ,092 ही मिले थे, पर ब्राह्मण मतों में उन्होंने बंटवारा कर सपा के संजय गर्ग की राह जरूर आसान कर दी थी।

भदोही में भाजपा के रविंद्रनाथ त्रिपाठी सपा के जहीद बेग से मात्र एक हजार,105 अधिक वोट पाकर विधायक बने। यहां बहुजन मुक्ति पार्टी के यादव प्रत्याशी को एक हजार, 354 वोट मिले, जो सपा के परंपरागत समर्थक माने जाते हैं। मऊ जिले की मुहम्मदाबाद गोहना सुरक्षित सीट से भाजपा के श्रीराम सोनकर बसपा के राजेंद्र कुमार से महज 538 मतों के अंतर से जीते थे।

उपेन्द्र

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