शायर कैफी आजमी की 21वीं पुण्यतिथि पर लखनऊ ने उन्हें किया याद
लखनऊ ( हि.स.)। मशहूर तरक्की पसंद शायर कैफ़ी आजमी की 21वीं पुण्यतिथि पर बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम में उन्हें याद किया। निशातगंज, पेपरमिल कॉलोनी स्थित कैफी आजमी अकादमी में आयोजित कार्यक्रम ‘कुछ यादें-कुछ बातें’ कैफी आज़मी और मिजवां के उनवान की ओर से हुआ। कार्यक्रम की सदारत साहित्यकार प्रो शारिब रूदौलवी ने की। मुख्य अतिथि राजनेता डॉ अम्मार रिज़वी थे। इस अवसर पर अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी अनीस अंसारी मौजूद रहे। इससे पहले अकादमी के जनरल सेक्रेटरी सैयद सईद मेहंदी ने मेहमानों का इस्तकबाल किया। अकादमी की सालाना रिपोर्ट पेश की।
कार्यक्रम का संचालन प्रो रेशमा परवीन ने कैफ़ी आज़मी को हर दिल अज़ीज शायर बताया। जनाब अतहर नबी साहब ने कैफ़ी आज़मी के साथ बिताये हुए लम्हों को साझा किया। कैफी़ साहब की अदबी और लखनऊ से वाबस्तगी और उनकी अदबी खिदमात पर रोशनी डाली।
इप्टा के नेशनल सचिव राकेश ने बताया कि कैफी साहब के कहने पर ही इप्टा कायम की गई। उनको शेर ‘प्यार का जश्न कुछ इस तरह मनाना होगा, गम किसी दिल में सही गम को मिटाना होगा…’ पर ही हम लोग काम करते आ रहे हैं। असिस्टेंट प्रो. उमैर मंजर ने कहा कि उनकी शख्यसियत जिंदगी के किसी मोड़ पर किसी की मोहताज नहीं रही। जिंदगी के आखरी दौर में वो व्हीलचेयर पर थे।
मुख्य अतिथि अम्मार रिज़वी ने बताया कि कैफी साहब के मिजवां गांव के लोगों में उनके प्रति तड़प और प्यार रहा। मुंबई छोड़कर ताउम्र अपने गांव रहे। अनीस अंसारी ने कहा कि कैफी के घरवाले उन्हें मौलवी बनाना चाहते थे। लेकिन उनकी जिंदगी तो शायरी थी। उनकी पहली नज्म अवध की शास्त्रीय गायिका बेगम अख्तर ने गाई।
प्रो. शारिब रूदौलवी ने लोगों का शुक्रिया अदा किया और कैफ़ी साहब के बारे में बताया कि कैफ़ी साहब अपने गांव मिजवां की तरक्की के लिए बहुत कोशिश की। वह कामयाब भी रहे, अब उनकी बेटी शबाना आजमी उनके काम को आगे बढ़ा रही है। डॉ प्रभा श्रीवास्तव ने कैफ़ी के लिखे कलाम सुनाकर प्रभावित किया।
शैलेंद्र/आकाश
