कैबिनेट मंत्री सतीश महाना ने तर्पण कार्यक्रम को बताया समाज के लिए बदलाव की मिसाल
युग दधिचि व बेटी बचाओ अभियान संस्थाओं ने श्राद्ध व तर्पण कार्यक्रम का किया आयोजन
कानपुर (हि.स.)। जब माता गौरी को जनेऊ अर्पित किया जा सकता है और महिला या बालिका जनेऊ धारण भी कर सकती है तो आज के पुरुष प्रधान समाज में वह अपने पूर्वजों और पुरखों का तर्पण और पिंडदान भी कर सकती है। नारी किसी भी रूप में पुरुष से पीछे नहीं है। जनपद में महिलाओं ने अपने पुरखों का श्राद्ध – तर्पण कर लोगों के सामने इस बात की बड़ी मिसाल कायम की। कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पौत्री ने भी वाजपेयी जी का तर्पण किया। वहीं, मंगलामुखी बहनों ने अजन्मी बच्चियों के लिए तर्पण कर समाज के सामने एक बड़े बदलाव का आईना दिखाने का काम किया।
दरअसल, युग दधिची देहदान और बेटी बचाओ अभियान संस्थाओं के द्वारा रविवार को सरसैय्या घाट पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और बेटियों के द्वारा अपने माता-पिता, भाई, पति और पूर्वजों का श्राद्ध किया गया। इसके साथ ही इस आयोजन में आई मंगलामुखी बहनों ने उन अजन्मी बच्चियों का तर्पण किया, जिनको इस दुनिया में आने से पहले ही मार दिया जाता है। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई की पौत्री ने भी उनको पिंडदान किया।
पूर्व प्रधानमंत्री की पौत्री ने खुद को बताया सौभाग्यशाली
पिंडदान एवं तर्पण करने आई पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पौत्री नंदिता मिश्रा ने कहा कि अपने बाबा की स्मृति में मैंने उनका तर्पण किया। यह क्षण मेरे लिए सौभाग्यशाली होने का है। बेटियां ऐसा नहीं कर सकती हैं, इस सोच को बदलना होगा। यह कार्यक्रम समाज की सोच बदलने का माध्यम बनेगा। दरअसल, नंदिता मिश्रा अटल जी के बड़े भाई प्रेम बिहारी वाजपेयी की पौत्री हैं। उनकी शादी पांडुनगर के रहने वाले राजेंद्र मिश्र बब्बू के छोटे बेटे सुमित मिश्र से हुई है।
वहीं, मंगलामुखी बहनों की ओर से अजन्मी बच्चियों को तर्पण करने आई काजल किरन ने बताया कि जो बहनें तर्पण नहीं कर सकती हैं, वो हमारे द्वारा आज किया जा रहा है। इससे समाज में यह संदेश जाएगा कि बेटियां तो धन्य होती हैं। ऐसे आदमी जिन्होंने अपनी बेटियों को अपने से दूर किया, उनसे संसार में गिरा आदमी कोई नहीं है। हमने पहले भी कहा था कि बेटियों के साथ ऐसा न किया जाए। बेटियां पैदा होने पर किसी को बोझ लगता है तो वह हमें दे दें। हम उनका लालन-पालन, पढ़ाई आदि कराकर नौकरी, शादी आदि में भी मदद करेंगे। इससे बच्चियां मानव जीवन का सबसे बड़ा कर्म कर सकेंगी।
बेटियों ने समाज के सामने रखी मिसाल
मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री सतीश महाना ने पिंडदान एवं तर्पण कार्यक्रम पर कहा कि, इन महिलाओं का मानना है कि आज के पुरुष प्रधान समाज में नारी किसी भी रूप में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिनके घर या परिवार में कोई पुरुष नहीं, उनके पुरखों या पूर्वजों को आखिर कौन पानी देगा। इसको लेकर बदलाव की मिसाल को समाज के सामने लाया गया है। इसलिए ऐसी अन्य महिलाओं को भी आगे आकर अपने पूर्वजों और परिजनों का अपने हाथों से श्राद्ध और तर्पण करना चाहिए।
आगे भी होते रहेंगे समाजोन्मुखी आयोजन
कार्यक्रम आयोजक एवं संस्था संयोजक मनोज सेंगर ने बताया कि युग दधिचि समिति के आयोजकों का कहना है कि नारी और बेटी की महत्ता बताने के लिए संस्था हमेशा ऐसे कार्यक्रम करती रही है और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के समाजोन्मुखी कार्यक्रमों का आयोजन आगे भी कराया जाता रहेगा।
इस श्राद्ध और तर्पण में उन्ही महिलाओं और लड़कियों ने भाग लिया, जिनके घर- परिवार में श्राद्ध करने के लिए कोई पुरुष नहीं है। इन महिलाओं और बेटियों ने पूरे वैदिक रीति-रिवाज और हिन्दू कर्मकांड विधान के मुताबिक अपने पूर्वजों और परिवारीजन को पिंडदान किया। उन्होंने अर्घ्य आदि देकर अपने पूर्वजों की आत्माओं की शान्ति-मुक्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। बाद में श्राद्ध कर उन्हें उनका प्रिय भोग भी अर्पित किया। इस आयोजन की यह भी विशेषता थी कि इनमें कई प्रतिष्ठित घरों की महिलाओं और बेटियों ने भी आगे आकर श्राद्ध कर्म को फलीभूत किया।
